यूपी के कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर रॉबिन कुमार की खुदकुशी से साथी और मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर हतप्रभ हैं। रॉबिन के परिजन भी यह नहीं समझ पा रहे हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। परिजनों के मुताबिक उनकी शादी के लिए लड़की ढूंढी ली गई थी।
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अस्त-व्यस्त कमरा
- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर के स्टेशन रोड पर स्थित सनराइज होटल में खुदकुशी करने वाले कानपुर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर राबिन कुमार (30) का शव पोस्टमार्टम के बाद उनके बड़े भाई जितेंद्र वर्मा गुरुवार को मेरठ ले गए। भाई ने बताया कि घरवाले इस साल उसकी शादी करने की तैयारी कर रहे थे और लड़की की तलाश भी हो गई थी।
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छात्रावास में हास्टल का अस्त-व्यस्त कमरा,डेमो पिक
मेरठ के गढ़ रोड स्थित राजनगर कॉलोनी निवासी शंकर लाल के पुत्र रॉबिन कुमार आठ जनवरी को गोरखपुर आने के बाद होटल में ठहरे थे। बुधवार की शाम को होटल के कमरा नंबर 111 में उनका शव फंदे पर लटकता मिला था। बिस्तर पर ही सुसाइड नोट भी मिला था। सुसाइड नोट में अपनी ही नजरों में गिर जाने की वजह से खुदकुशी किए जाने की बात लिखी थी।
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डेमो पिक
हॉस्टल का कमरा अस्त-व्यस्त
डॉ. रॉबिन ऑर्थोपेडिक्स में एमएस कर रहे थे। श्रीराम छात्रावास स्थित डॉ. राबिन के कमरे का सामान अस्त-व्यस्त था। बंद कमरे की लाइटें जलती मिलीं। उसी के बैच के जूनियर डॉक्टर एवं करीबी दोस्त डॉ. भूपेंद्र और बगल के कमरे में रहने वाले डॉ. अभिनंदन चटर्जी गुरुवार को उनकी मौत की सूचना से हतप्रभ नजर आए।
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डेमो पिक
उन्होंने बताया कि राबिन मेधावी था। सात महीने की दोस्ती में वह कभी तनाव या डिप्रेशन में नजर नहीं आया। रॉबिन का स्वभाव हंसमुख था। राबिन के भाई जितेंद्र वर्मा ने गुरुवार को डॉ. भूपेंद्र को मोबाइल कर जानकारी ली। डॉ. भूपेंद्र ने उन्हें बताया कि 6 जनवरी को वे सभी मंदाकिनी होटल में पार्टी में गए थे। वहां से लौटने के बाद डा. राबिन ने 7 जनवरी को 24 घंटे इमरजेंसी में ड्यूटी की थी। वह डॉ. जीके सेंगर की यूनिट में थे। 8 जनवरी को सुबह उनकी ओपीडी और 24 घंटे के लिए इमरजेंसी में दोबारा ड्यूटी थी, पर वह ओपीडी में नहीं पहुंचे न ही इमरजेंसी गए। मोबाइल स्विच ऑफ बताता रहा।
कालेज प्रशासन ने साधी चुप्पी
इस मामले में मेडिकल कालेज प्रशासन चुप्पी साधे रहा। प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने बताया कि वह इससे आहत हैं। हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एके गुप्ता से जानकारी ली जाएगी।