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बाॅलीवुड के मशहूर गीतकार की इन नज्मों पर झूम उठे युवा 

Tue, 27 Mar 2018 02:22 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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इरशाद कामिल - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला संवाद कानपुर में मशहूर गीतकार इरशाद कामिल ने न केवल अपनी बातों से लोगों का दिल जीता बल्कि शायरी और गीतों से समा भी बांध दिया। अपने ‘द इंक बैंड’ के म्यूजिकल धुनों के बीच इरशाद ने एक से बढ़कर एक शायरी और नज्म कहीं।
 
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नज्मों पर झूमे युवा 

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इरशाद कामिल - फोटो : अमर उजाला
‘पहले तो दिल में बस गया ईमान की तरह, अब बात भी करता है तो एहसास की तरह...’ सुनाकर युवाओं की खूब तालियां बटोरीं। ‘मैं उसका हो भी चुका और उसको खबर ही नहीं, इलाही इस खबर से बेखबर करे मुझको’ भी लोगों ने खूब सराही। ‘धूप का एक टुकड़ा रहता है इन पलकों की छांव में, अच्छा खासा शहर बसा है एक छोटे से गांव में’, ‘कुछ रिश्तों का नमक ही दूरी होता है... न मिलना भी बहुत जरूरी होता है...’ जैसी कई शायरी के जरिए इरशाद ने देर शाम तक लोगों को मंत्रमुग्ध किया। 
 
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इरशाद  ने कहा आइटम सांग होना कोई खराब बात नहीं 

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इरशाद कामिल - फोटो : अमर उजाला
मशहूर गीतकार इरशाद कामिल ने हर फिल्म में आइटम सांग के जरूरी होने के सवाल पर कहा कि आइटम सांग होना खराब बात नहीं। लेकिन अगर सांग का एटीट्यूड खराब है तो वह जरूर भद्दा लगता है। फिल्म चमेली के आइटम सांग को उसकी जरूरत बताया। 
 

संघर्ष भरा रहा  फिल्म इंडस्ट्री का सफर 

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इरशाद कामिल - फोटो : अमर उजाला
इरशाद ने फिल्म इंडस्ट्री में खुद के संघर्ष की कहानी भी बताई। बोले, चंडीगढ़ का रहने वाला हूं। लिखने का काफी शौक था इसलिए मुझे एक शख्स ने अपना विजिटिंग कार्ड देते हुए दिल्ली बुलाया। बोला कि मैं तुम्हें मुंबई ले जाऊंगा लेकिन जब दिल्ली गया तो वह व्यक्ति लापता हो गया। तीन दिन तिब्बतों के कैंप में रहा। घर जाने का भी मूड नहीं था इसलिए मुंबई के लिए जनरल टिकट करवाया और निकल पड़ा अपने सपनों की राह पर। मुंबई में भी करीब डेढ़ साल स्ट्रगल करने के बाद इम्तियाज अली से मुलाकात हुई। इम्तियाज ने भी उस वक्त तक कोई फिल्म नहीं बनाई थी और मैंने भी। इसके बाद संघर्ष का दौर कुछ खत्म हुआ और फिल्म चमेली, शब्द, सोचा न था जैसी फिल्मों के लिए लिखने का मौका मिल गया।
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...और जब पुलिस ने पकड़ लिया

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इरशाद कामिल - फोटो : अमर उजाला
इरशाद ने बताया कि शुरुआत में वह और इम्तियाज एक रात मुंबई की सड़कों पर फिल्म चमेली के गाने को लेकर बातें कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस आई और हमसे पूछा क्या करते हो? इम्तियाज ने खुद को फिल्म डायरेक्टर बताया और मैंने गीतकार। फिर पुलिस ने इम्तियाज से पूछा कि कौन से फिल्म के डायरेक्टर हो इसपर वह बोले कि अभी बनाऊंगा। कुछ इसी तरह का जवाब मेरा भी था। पुलिस ने हम दोनों को खुद के पैसों से चाय पिलाई और छोड़ दिया। 
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