इरशाद कामिल
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‘पहले तो दिल में बस गया ईमान की तरह, अब बात भी करता है तो एहसास की तरह...’ सुनाकर युवाओं की खूब तालियां बटोरीं। ‘मैं उसका हो भी चुका और उसको खबर ही नहीं, इलाही इस खबर से बेखबर करे मुझको’ भी लोगों ने खूब सराही। ‘धूप का एक टुकड़ा रहता है इन पलकों की छांव में, अच्छा खासा शहर बसा है एक छोटे से गांव में’, ‘कुछ रिश्तों का नमक ही दूरी होता है... न मिलना भी बहुत जरूरी होता है...’ जैसी कई शायरी के जरिए इरशाद ने देर शाम तक लोगों को मंत्रमुग्ध किया।