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इनोवेटिव आइडिया सोचना ही नहीं उसे साकार करना भी जरूरी

Sat, 24 Nov 2018 01:21 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर में शुरू हुई तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
- देशभर से जुटे वैज्ञानिकों ने स्कूली बच्चों को दिया तकनीक और विज्ञान का ज्ञान
 
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‘फ्यूचर इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ विषय पर संवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में अवधपुरी स्थित वीरेंद्र स्वरूप एजुकेशन सेंटर में इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन, कानपुर चैप्टर की ओर से तीन दिवसीय संगोष्ठी शुरू हुई। ‘फ्यूचर इंडिया : साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ विषय पर संवाद करने के लिए देशभर के कई बड़े वैज्ञानिक संगोष्ठी का हिस्सा बने।
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वैज्ञानिक प्रो. डीएन राव ने युवाओं को स्टार्टअप के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि इनोवेटिव आइडिया सोचना और उसे हकीकत में बदलना ही विकास की पहली सीढ़ी होती है। मेरठ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. केसी पांडेय ने कहा कि वर्तमान में विकास की रफ्तार टेक्नोलॉजी पर टिकी है। इसलिए शोध को बढ़ावा देना और हर समस्या का हल टेक्नोलॉजी के जरिए खोजना जरूरी हो गया है। कोलकाता से आए डॉ. मनोज चक्रवर्ती ने प्रोटीन से होने वाली बीमारी के बारे में विस्तृत जानकारी दी। प्रो. गंगाधर ने इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के बारे में बताया। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि भारत में विज्ञान और तकनीक क्षेत्र की प्रतिभाओं की कमी नहीं है। अगर देश का भविष्य उज्ज्वल करना है, तो इन प्रतिभाओं का समुचित उपयोग करना होगा। 

इससे पहले छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पूर्व कुलपति दिवंगत प्रो. सर्वज्ञ सिंह कटियार को वैज्ञानिकों ने श्रद्घांजलि दी। अतिथियों का स्वागत कुमकुम स्वरूप ने किया। संगोष्ठी में अलग-अलग राज्यों के 40 से अधिक डिग्री कॉलेज के शिक्षकों ने हिस्सा लिया।  संयोजिका डॉ. विजय लक्ष्मी सक्सेना, डॉ. अशोक सक्सेना, डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव, डीजी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. साधना सिंह ने विचार रखे। आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद दीक्षित, प्रो. सुधीर श्रीवास्तव, प्रो. एन बैरागी, प्रो. रंजीत वर्मा, डॉ. राजीव श्रीवास्तव, डॉ. सुनीत अवस्थी, डॉ. सुनीता आर्या, डॉ. अर्चना दीक्षित, डॉ. उर्वशी बाजपेयी मौजूद थे।
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डेमो पिक
शोध से ही मिलेगा नया स्वरूप
हेरीटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कलकत्ता के वैज्ञानिक प्रो. स्वामी ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए शोध करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असली शोध वही है, जो समाज और पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न पहुंचाए। बोले, निरंतर शोध होना चाहिए।
 
फल, सब्जियां खाइए और कैंसर से बचिए
चितरंजन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, कलकत्ता के वैज्ञानिक डॉ. सीके पांडा ने ब्रेस्ट कैंसर पर चल रहे शोध कार्यों की जानकारी दी। बताया कि कैंसर से बचाव के लिए सभी को नाइट्रोजन आक्साइड से भरपूर फल और सब्जियां खानी चाहिए। इससे धमनियों के जमाव को रोका जा सकता है। यह कैंसर की रोकथाम में सहायक हो सकता है।
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