महोबा के इंद्रकांत त्रिपाठी मामले में एसआईटी द्वारा एक सप्ताह तक विभिन्न बिंदुओं पर की गई जांच पड़ताल के बाद क्रशर कारोबारी इंद्रकांत को ही आत्महत्या का दोषी माना। जिससे नामजद अभियुक्तों को राहत मिल गई है। कारण आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले में मात्र सात साल की सजा का प्रावधान है।
कस्बा कबरई के जवाहर नगर निवासी क्रशर कारोबारी इंद्रकांत त्रिपाठी को आठ सितंबर को गोली लगने के बाद उसे रिजेंसी कानपुर में भर्ती कराया गया था। जहां पर उसकी मौत हो गई थी। इंद्रकांत की मौत के बाद मामला हाई प्रोफाइल हो जाने के कारण शासन ने क्रशर कारोबारी की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया।
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वायरल हो रहा है इंद्रकांत का फेसबुक पोस्ट
- फोटो : amar ujala
महोबा आई एसआईटी ने आठ दिन तक जांच पड़ताल कर क्रशर कारोबारी मामले का खुलासा कर इंद्रकांत को ही खुदखुशी का जिम्मेदार माना। अब आत्महत्या का मामला प्रकाश में आने के बाद नामजद अभियुक्तों पर दर्ज किए गए हत्या के मुकदमे की धाराएं हटने के आसार बढ़ गए हैं। जिससे अब अभियुक्तों को राहत मिल गई है।
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इंद्रकांत त्रिपाठी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
हत्या में आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। यदि आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धाराएं लगती हैं तो धारा 306 में सात साल की सजा का प्रावधान है। हालांकि दोनों धाराओं में जमानत जिला मुख्यालय के बजाय हाई कोर्ट से ही होगी लेकिन यदि हत्या की धारा 306 में परिवर्तित होती है तो अभियुक्तों को कम सजा भुगतनी पड़ेगी।इंसेट
एसआईटी के खुलासे से परिजन असंतुष्ट
एसआईटी के खुलासे पर मृतक के भाई रविकांत त्रिपाठी ने असंतोष जताते हुए डीजीपी को पत्र भेजकर एसपी से ऊपर स्तर के अधिकारी से जांच कराए जाने की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया कि तत्कालीन एसपी पर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी एसआईटी ने आजतक न तो पूर्व एसपी मणिलाल पाटीदार से न कोई पूछताछ की और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की। उल्टा उन्हें कोरोना के बहाने क्वारंटीन बताकर छूट दे दी। पत्र में निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।