योगी सरकार के फरमान से एक्शन में आए अफसरों ने पुलिस फोर्स के साथ कानपुर, फर्रुखाबाद, उन्नाव समेत तमाम जिलों में बने बूचड़खानों (स्लाटर हाउस) को सीज कर दिया। इस दौरान बूचड़खाने से जुड़े कसाइयों ने जमकर हंगामा काटा। बूचड़खाने से सैकड़ों मवेशियों को बाहर निकालकर ताला जड़ दिया गया।
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बूचड़खानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई
- फोटो : राहुल शुक्ला
कानपुर के बकरमंडी और कर्नलगंज में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खाने (स्लाटर हाउस) को सीज कर दिया। इस दौरान बूचड़खाने से जुड़े कसाइयों ने हंगामा किया। स्लाटर हाउस से सैकड़ों मवेशियों को बाहर निकालकर ताला लगा दिया गया। बकरमंडी और कर्नलगंज के बूचड़खाने नगर निगम के हैं।
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बूचड़खानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई
23 दिसंबर 2013 को प्रदूषण बोर्ड ने प्रदूषण फैलने का हवाला देते हुए कानपुर के सारे बूचड़खाने बंद करा दिए थे। लेकिन, कसाइयों के हंगामे के बाद अफसरों ने दोबारा बूचड़खानों की तरफ रुख नहीं किया और उसके बाद से अवैध रूप से यहां जानवरों का कटान होने लगा था।
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बूचड़खानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई
बुधवार को कुलीबाजार में स्लाटर हाउस में काम करने वाले लोगों ने जमकर उत्पात मचाया लेकिन पुलिस की सख्ती की वजह से उनकी एक न चल पाई। उधर फर्रुखाबाद में स्लाटर हाउसों को बंद करने के लिए भारी पुलिसबल बुलाया गया है।
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बूचड़खानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई
कानपुर शहर के सारे बूचड़खाने 2013 से बंद हैं। पर यहां अवैध कटान धड़ल्ले से जारी है। नगर निगम ने मंगलवार को जब छापा मारा तो यहां 100 मवेशी कटाने के लिए लाए गए थे। इसके बार में नगर निगम के अफसरों को भी मालूम था। इसकी पुष्टि खुद कसाइयों ने की, लेकिन अफसरों का कुछ और ही कहना है।
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बूचड़खानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई
नगरनिगम के पशु चिकित्सा अधिकारी एके सिंह का कहना है कि प्रदूषण बोर्ड की कार्रवाई के बाद से स्लाटर हाउस बंद चल रहा था। वहां पर किसी की मवेशी को काटा नहीं जा रहा है। अब सवाल है कि अफसर सही बोल रहे हैं या कसाई।
अवैध स्लाटर हाउस से मवेशी की सप्लाई करने वाले कई परिवार जुड़े हैं। उनका कहना है कि स्लाटर हाउस को सीज किए जाने से वे बेरोजगार हो जाएंगे और उनका परिवार सड़क पर आ जाएगा। उनमें से ज्यादातर पढ़े-लिखे नहीं है। इसलिए वे इसके अलावा और कोई काम नहीं कर सकते हैं।