आईआईटी कानपुर सिविल इंजीनियरिंग विभाग शरीर पर बुरा असर डालने वाली गैसों और वायु प्रदूषण की जांच शुरू करने वाला है। आईआईटी को इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 1.2 करोड़ रुपये दे दिए हैं।
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कानपुर में 5 जगहों पर मोबाइल एयर सैंपलर लगाकर प्रदूषण और जहरीली गैसों की जांच की जाएगी। इसके लिए आईआईटी, रामादेवी, विकास नगर, नवीन मार्केट और पनकी को सेंटर बनाया गया है। एयर सैंपलर के माध्यम से हानिकारक तत्व हानिकारक गैसों के उत्सर्जन, पटाखों और केमिकलयुक्त धुएं में आंखों से न दिखने वाले नैनो पार्टिकल्स के आकार और संख्या का पता लगाया जाएगा। दिल्ली के बाद यूपी के कई जिलों में वायु प्रदूषण का स्तर मानक से बहुत ज्यादा है। इन जिलों में कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, आगरा, बुलंदशहर, मुजफ्फर नगर आदि शामिल हैं।
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प्रदेश में सबसे ज्यादा खराब हवा कानपुर की
दो दिन से खराब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का प्रदूषण मापक यंत्र (पॉल्युशन मीटर) तीसरे दिन बृहस्पतिवार को दिन में ठीक किया गया।
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मौसम विभाग के अनुसार हवा में नमी अधिक होने की वजह से शहर का एक्युआई एक दिन पहले से भी बढ़कर रात नौ बजे 484 तक पहुंच गया जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक रहा। एक दिन पहले कानपुर का एक्यूआई रात के नौ बजे तक 402 रिकॉर्ड किया गया था।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार प्रदूषण रोकने के लिए जारी एडवाइजरी का कोई पालन नहीं होने से संभावना है कि यह एक्युआई अभी और बढ़ सकता है। दिल्ली का एक्युआई 500 से ऊपर रहा, जबकि लखनऊ में प्रदूषण की स्थिति रात के नौ बजे 303, आगरा में 375 रिकॉर्ड की गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि नेहरू नगर में स्थापित पॉल्युशन मीटर अब ठीक रीडिंग देने लगा है।