आईआईटी कानपुर के प्रो. बीवी फड़ी ने छात्रों से अपने शुरुआती दौर की भी कहानी साझा की। बताया कि प्रोफेसर बनने से पहले वे भी एक स्टार्टअप कंपनी के सीईओ थे। उस कंपनी में 100 कंप्यूटर थे, जिसके सहारे उन्होंने पांच सौ करोड़ रुपये तक का बिजनेस किया।
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डेमाे पिक
प्रो. फड़ी ने बताया कि स्नातक की पढ़ाई के बाद एक दोस्त उनके पास आया। उसने बताया कि उसने 20 हजार रुपये वाले 100 कंप्यूटर 12-12 हजार रुपये में खरीदे हैं। जिसे वह लोगों को महंगे दाम में बेचेगा। तभी दुनिया में आर्थिक संकट का दौर आ जाता है और लोग कंप्यूटर खरीदने से मना कर देते हैं। तब उस दोस्त ने एक कंपनी खोली और उन्हें सीईओ बनाया।
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प्रो. फड़ी ने बताया कि जून-जुलाई में उन्होंने स्कूलों से समझौता कर बच्चों को कंप्यूटर सिखाना शुरू किया। तब साल में सात से आठ लाख रुपये की आमदनी होने लगी। इसके बाद स्कूलों में ही कमरे लेकर बाहरी लोगों को कंप्यूटर सिखाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे कंपनी काफी प्रचलित हो गई। दो अन्य राज्यों में भी यही काम शुरू किया।
इस समय कंपनी का सालाना बिजनेस 500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। तभी कंपनी के फाउंडर की नीयत बदली और उनकी सैलरी कम करने को कह दिया। तब उन्होंने कंपनी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने आईआईएम बंगलूरू से मैनेजमेंट की पढ़ाई की और आईआईटी में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर पढ़ाने लगे। प्रो. फड़ी बताते हैं कि वे यहां दोनों काम करते हैं। स्टार्टअप को प्रमोट भी कर रहे हैं और बच्चों को शिक्षा भी दे रहे हैं।