होली के दिन यानी दो मार्च को शुक्रदेव चाल बदल रहे हैं। शुक्रवार को होलिका दहन होगा। पं. अश्विनी त्रिपाठी ने बताया कि होलिका दहन देखना कुछ के लिए शुभ तो कुछ लोगों के लिए अशुभ साबित हो सकता है।
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राशि के अनुसार होलिका दहन देखने का फल अलग-अलग है। कुछ राशियों के लिए होलिका दहन कष्टों से मुक्तिकारक तो कुछ राशियों के लिए अमंगलकारी साबित हो सकता है। इस बार शुक्र गृह सुबह 11:43 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेगा। यह 26 मार्च को दोपहर 3:47 मिनट तक वहीं पर रहेगा।
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शुक्र के मीन राशि में इस गोचर से विभिन्न राशियाें पर अलग-अलग प्रभाव होगा। मेष राशि वालाें को परिवार और संतान का सुख मिलेगा। वृष राशि वालों के लिए धनलाभ के संयोग बनेंगे।
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मिथुन राशि वालों को सावधानी बरतनी होगी, नहीं तो बड़ी मुश्किल में फंस सकते हैं। कर्क राशि वालों के मनचाहे कार्य पूरे होंगे। सिंह राशि वाले किसी से उधार न लें और झगड़ों से बचें।
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कन्या राशि वाले पढ़ाई पर ध्यान दें तो बेहतर भविष्य के संयोग बनेंगे। तुला राशि वालों के लिए शुक्र के गोचर से धन लाभ के संयोग बन रहे हैं। वृश्चिक राशि वालों में धर्म के प्रति आस्था बढ़ेगी। धनु राशि वालों को आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलेगी।
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इनकी तरक्की की राह खुलेगी। मकर राशि, कुंभ राशि व मीन राशि वालों को सजग रहने की आवश्यकता है। इष्टदेव के श्रृंगार व स्मरण से इनके कष्ट दूर होंगे। शुक्र का यह गोचर तुला, वृश्चिक, कुंभ, कर्क व मकर राशि वालाें का भाग्योदय करेगा।
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शाम 7:30 बजे होली दहन का मुहूर्त शुभ
पं. अश्विनी त्रिपाठी ने बताया कि एक मार्च को सुबह 8:58 मिनट से पूर्णिमा तिथि लग रही है। इसके चलते शाम 7:30 के बाद भद्रा खत्म होने के बाद होलिका दहन किया जा सकेगा। घर के बाहर होलिका की पूजा की जाती है। होलिका की आराधना में चावल, फूल, खड़ी मूंग, खड़ी हल्दी, नारियल व गोबर की गुलरियां (बल्ला) अर्पित करने के बाद होली की परिक्रमा कर पानी चढ़ाना लाभदायक होगा।
होलिका की राख से स्नान से दूर होते हैं रोग
होली का सांस्कृतिक महत्व होने के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी है। बुुजुर्गों व शास्त्र विशेषज्ञों के अनुसार होलिका दहन की राख को स्वच्छ पानी में मिलाकर स्नान करने से व्यक्ति निरोग रहता है। इसके अलावा होलिका में भूंजी जाने वाली गेहूं की बाली सभी में वितरित कर गले मिला जाता है। इससे आपसी भाईचारा मजबूत होता है।
पूजन से धन समृद्धि
पं. अश्विनी त्रिपाठी ने बताया कि विधि विधान से होलिका का पूजन करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। होलिका पूजन से पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। पितरों की पूजा करने से आत्मा को शांति मिलती है। होलिका दहन के दिन भोर पहर 108 मखानों की माला बनाकर लक्ष्मी को श्रद्धाभाव से चढ़ाने से आर्थिक समृद्धि होती है। वहीं सवा किलो चावल की खीर बनाकर कुष्ठाश्रम में देने के साथ ही उत्तर दिशा में शुद्ध घी का दीपक जलाने से धन की प्राप्ति होती है।