बिकरू कांड में आरोपी खुशी की फर्जी सिम के मामले में सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में अब 11 फरवरी को होगी। मंगलवार को सुनवाई टल गई। बिकरू कांड में विकास दुबे के करीबी अमर दुबे की कथित पत्नी नाबालिग खुशी के मामले की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है।
विज्ञापन
2 of 5
मनु, विकास दुबे, खुशी दुबे
- फोटो : amar ujala
मंगलवार को खुशी बाराबंकी से नहीं आ पाई। इससे सुनवाई टल गई। खुशी के अधिवक्ता शिवकांत दीक्षित ने बताया कि बोर्ड ने अगली तिथि 11 फरवरी निर्धारित की है। वहीं विकास दुबे के भाई दीपक दुबे उर्फ दीपू की पत्नी अंजलि की अग्रिम जमानत पर मंगलवार को सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि बहस पूरी हो गई है। फैसला सुरक्षित कर लिया गया है। बिकरू कांड में दाखिल की गई पूरक चार्जशीट में मनु पांडेय का जिक्र तक नहीं है, जबकि पहली चार्जशीट में पुलिस ने ही उसके खिलाफ साक्ष्य मिलने का दावा कर जांच जारी रहने की बात कही थी।
विज्ञापन
3 of 5
अमर दुबे और खुशी
- फोटो : अमर उजाला
अब उसका नाम हटाने से पुलिस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कहीं पुलिस मनु को क्लीन चिट देकर गवाह बनाने की तैयारी में तो नहीं है। हालांकि जानकारों का कहना है कि मनु की जो भूमिका है और जो उसके खिलाफ साक्ष्य हैं, उससे उसको गवाह बनाना संभव नहीं है। पुलिस ने माती कोर्ट में उमाशंकर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। हाल में गिरफ्तार किए गए विपुल दुबे के खिलाफ जांच के बाद चार्जशीट लगाई जाएगी। मगर पूरी चार्जशीट में मनु का नाम नहीं है।
4 of 5
विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
उसमें न तो यह लिखा है कि मनु को क्लीन चिट दे दी गई है और न ही यह स्पष्ट किया है कि उसके खिलाफ जांच जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि मनु को लेकर पुलिस बैकफुट पर क्यों है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (कॉल रिकॉर्डिंग) होने के साथ-साथ उसके घर के आंगन में सीओ को मारा गया और वह पुलिस को गुमराह करती रही। इसके बावजूद पुलिस ने उसे आरोपी नहीं बनाया।
पुलिस ने बिकरू कांड में नाबालिग खुशी दुबे, रेखा, शांति समेत चार महिलाओं को जेल भेजा है। पुलिस के पास केवल इन सभी के खिलाफ आरोपों की कहानी है। किसी पर ललकारने तो किसी पर वारदात के वक्त कारतूस देने का दावा है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के नाम पर कुछ खास नहीं है, फिर भी सभी को जेल भेज दिया था। जिसके खिलाफ साक्ष्य हैं, वह अभी भी सलाखों के बाहर है।