हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे में छह लोगों की मौत के बाद जांच में नया मोड़ आ गया है। छह मौतों के बाद निर्माण सामग्री से लेकर निगरानी व्यवस्था तक सब जांच के घेरे में है। तवा की रेत, खराब सीमेंट और टूटे पिलर ने सवाल खड़े किए हैं।
हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे में छह लोगों की मौत के बाद जांच का दायरा अब केवल आंधी-तूफान तक सीमित नहीं रह गया है। दूसरे दिन निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों, निगरानी व्यवस्था और निर्माण प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। घटनास्थल की पड़ताल, प्रत्यक्षदर्शी गार्ड के आरोप और कंपनी के स्टोर यार्ड की स्थिति ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
शनिवार को हमारी टीम ने हादसे वाले स्थल और निर्माण कंपनी के स्टोर यार्ड का निरीक्षण किया। घटनास्थल पर ढहा हुआ कंक्रीट ढांचा, कई जगहों से बाहर निकली सरिया, क्षतिग्रस्त लॉन्चिंग गैंट्री और टूटे पिलर दिखाई दिए। जिस हिस्से के नीचे दबकर छह मजदूरों और कर्मचारियों की मौत हुई थी वहां अब भी भारी मलबा और टूटी संरचना मौजूद है।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy
- फोटो : amar ujala
स्थानीय लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा टूटे पिलर को लेकर रही। लोगों का कहना है कि तकनीकी जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संरचना का कौन सा हिस्सा पहले कमजोर हुआ और इतनी बड़ी विफलता कैसे हुई।
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आरोप : निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच की जानकारी नहीं दी जाती थी
हादसे में बचे गार्ड अवधपाल ने निर्माण कार्य को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह लंबे समय से साइट पर तैनात थे और उनके सामने ही काम चलता रहा। उन्होंने दावा किया कि बेतवा नदी से निकाली गई रेत का इस्तेमाल निर्माण में किया जा रहा था। अवधपाल के अनुसार मजदूरों को निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच की कोई जानकारी नहीं दी जाती थी। उन्होंने मांग की कि रेत, सीमेंट और अन्य सामग्री की स्वतंत्र तकनीकी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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गार्ड ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में तेजी के दबाव में काम कराया जा रहा था। उनके अनुसार इंजीनियर राजू और पवन समय से पहले काम पूरा कराने में लगे थे और खराब मौसम के बावजूद निर्माण जारी रहा। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह जांच का विषय है।
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जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी हादसे की वजह : एडीजी
बेतवा नदी पुल हादसे की सूचना मिलने पर शुक्रवार को एडीजी प्रयागराज ज्योति नारायन डीआईजी बांदा के साथ घटनास्थल पहुंचे और मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने अफसरों से घटना की जानकारी लेकर निर्माणाधीन पुल का जायजा लिया।
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बातचीत में एडीजी ने कहा कि दो गांवों के बीच बेतवा नदी पर 700 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। इसमें करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। प्रथम दृष्टया यह एक बड़ा हादसा है। दो कॉलमों को जोड़ने के लिए रखा जा रहा भारी स्लैब गिरने से जनहानि हुई है और दो क्रेन भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
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उन्होंने कहा कि हादसे की वास्तविक वजह विशेषज्ञों और इंजीनियरों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। जांच में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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जांच में स्थिति होगी स्पष्ट
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी अन्यथा खामियां भी सामने आएंगी। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे की जांच केवल मौसम पर नहीं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी केंद्रित होनी चाहिए। फिलहाल बेतवा किनारे पड़ा मलबा, टूटे पिलर, बाहर निकली सरिया, खराब हालत में मिली सीमेंट की बोरियां और प्रत्यक्षदर्शियों के आरोप कई ऐसे सवाल छोड़ रहे हैं जिनके जवाब तकनीकी जांच, पुलिस पड़ताल और विभागीय रिपोर्ट से ही सामने आ सकेंगे।
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चेतावनी के बावजूद मजदूरों को नहीं भेजा सुरक्षित स्थान
मृतक पुष्पेंद्र सिंह चौहान के भाई राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि मौसम को लेकर पहले से चेतावनी जारी थी। इसके बावजूद मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया। उनका कहना है कि हादसे के बाद भी कंपनी के जिम्मेदार लोग मौके पर नहीं पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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इनकी चली गई जिंदगी, परिवार हो गए बेसहारा
हादसे में गंगाचरण यादव, सभाजीत उर्फ लाला, लोकेंद्र निषाद, कुलदीप निषाद, पुष्पेंद्र सिंह चौहान और राजेश पाल की मौत हुई थी। हादसे के बाद सभी परिवार बेसहारा हो गए। परिजन का कहना है कि आर्थिक सहायता जरूरी है लेकिन उससे भी अधिक जरूरी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करना है।
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श्रम विभाग ने निर्माण कंपनी को जारी किया नोटिस
श्रम विभाग ने निर्माण कंपनी को वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार मृतकों के आश्रितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और विभिन्न विभागीय टीमें मामले की जांच करेंगी।