कानपुर में उम्मीद के मुताबिक मतदान नहीं होने की वजह से अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर संगठन की तलवार लटक गई है। इतने कम मतदान के पीछे सरकार की नीतियों पर लोगों का पूरी तरह से भरोसा न होना बताया जा रहा है। कहा जा रहा, इसका पूरा ठीकरा जिम्मेदार लोगों पर फोड़ा जाएगा।
विज्ञापन
2 of 5
गोविंद नगर विधानसभा उपचुनाव
- फोटो : अमर उजाला
उपचुनाव होने के बावजूद जिस तरह से तैयारियां की गई थीं, उसे देखते हुए स्थानीय स्तर पर कम से कम 50 प्रतिशत मतदान की रिपोर्ट शुरू में दी गई थी। प्रदेश संगठन और प्रदेश सरकार भी इतने कम वोटिंग (33.16) प्रतिशत को लेकर चिंतित है।
विज्ञापन
3 of 5
गोविंद नगर विधानसभा उपचुनाव
- फोटो : अमर उजाला
सिर्फ महानगर की गोविंदनगर विधानसभा सीट ऐसी है जहां पर चुनावी जनसभा करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो बार आए। एक बार चुनाव की घोषणा से ठीक पहले और दूसरी बार मतदान से पहले।
4 of 5
गोविंद नगर विधानसभा उपचुनाव
- फोटो : अमर उजाला
दोनों जनसभाओं में घोषणा की गई थी कि उनकी पार्टी का प्रत्याशी पिछले चुनाव से भी अधिक अंतर से जीत हासिल करेगा। कई कैबिनेट स्तर के मंत्रियों को भी मानीटरिंग के लिए लगाया गया। राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश, अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया भी आखिर समय में बैठक करने पहुंचे।
इतनी कवायद के बाद ढाक के तीन पात वाली कहावत साबित हुई है। एलआईयू (लोकल इंटेलीजेंस यूनिट) ने जो रिपोर्ट सरकार और संगठन के प्रदेश प्रमुख को भेजी है, उसमें कुछ प्रमुख भाजपाइयों को छोड़कर ज्यादातर की रिपोर्ट निगेटिव बताई जा रही है।