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... तस्वीरों में देखें अपनी 'भारतीय सेना का शौर्य'  

Sat, 13 Jan 2018 08:30 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

- ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स (मैकनाइज्ड) की 14वीं बटालियन के स्वर्ण जयंती समारोह का आगाज
शौर्य के 50 साल, हर मोर्च पर डटे रहे भारत मां के वीर लाल
 
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शौर्य के 50 साल, हर मोर्च पर डटे रहे भारत मां के वीर लाल
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा... की धुन बजाता आर्मी बैंड, कदम से कदम मिलाकर मार्चपास्ट करते सेना के जवान, बख्तरबंद सैन्य गाड़ियां। यह नजारा रहा शुक्रवार को कानपुर छावनी स्थित 14वीं बटालियन ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स परिसर का। मौका था बटालियन के तीन दिवसीय स्वर्ण जयंती समारोह के आगाज का। 
 
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शौर्य के 50 साल, हर मोर्च पर डटे रहे भारत मां के वीर लाल
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल सुरेंद्र सिंह (कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिम) ने किया। इस मौके पर उन्होंने बटालियन के शौर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि जब-जब देश को जरूरत पड़ी है, तो इस बटालियन ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। कार्यक्रम स्थल पर गंगासागर द्वार बनाया गया है।
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सन् 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में इस बटालियन ने गंगासागर के आसपास के इलाके में पाकिस्तानी सेना को करारी शिकस्त दी थी। उसकी याद में यह द्वार बनाया गया है।  इसके सामने खड़े होकर सैनिकों, अफसरों के परिवारों ने फोटो भी खिंचाई। कार्यक्रम में कर्नल क्षितिज बलहारा, कर्नल वीरम, कर्नल सम्राट नागर, मेजर विशाल राजपुरे, मेजर राहुल वर्मा, कैप्टन चंदर सिंह वोरा, कैप्टन अंकित यादव, मेजर योगेंद्र कटियार आदि मौजूद रहे।

समारोह में इन्हें मिला सम्मान

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मेजर पवन कुमार मिश्रा, सूबेदार बीजू कुमार, हवलदार समीर घोष, लांसनायक रूपचंद्र को विशिष्ट सेवाओं के लिए मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल सुरेंद्र सिंह ने सम्मानित किया। 
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बटालियन का संक्षिप्त इतिहास

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13 जनवरी 1968 को इस बटालियन का गठन लेफ्टिनेंट कर्नल जार्ज क्लिफ्टन की अगुवाई में कोटा (राजस्थान) में 32 गार्ड्स के रूप में हुआ था। इसका उद्देश्य था नागालैंड, मिजोरम में उग्रवाद से निपटना। बाद में इसका पुनर्गठन करते हुए ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स 14 वीं बटालियन का नाम दिया गया। 
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लांसनायक एल्बर्ट एक्का को मिला था परमवीर चक्र

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भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध में बटालियन को पूर्वी पाकिस्तान में लड़ने के लिए भेजा गया था। अफसरों और सैनिकों ने शौर्य का जबरदस्त परिचय दिया था। इनमें लांसनायक एल्बर्ट एक्का ने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे। हालांकि, वे वीरगति को प्राप्त हुए थे। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया था।
 
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शौर्य के कुछ कदम

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- ऑपरेशन ट्राइडेंट, ऑपरेशन हर्रे, ऑपरेशन रक्षक ।
- आपरेशन मेघदूत में सियाचिन ग्लेशियर पर दुश्मन को खदेड़ा था।
- शांति स्थापना के लिए अगस्त 2006 से अप्रैल 2009 तक इथोपिया एवं इरीट्रिया, लेबनान और साउथ सूडान में तैनात रही बटालियन
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