जिले में करीब हर गांव का किसान अावारा पशुअाें की समस्या से परेशान है। निवादा गांव सहित आसपास के 10 गांवों के किसान इन दिनों राहत की सांस ले रहे है। गांव निवासी दुष्यंत सिंह उर्फ रज्जन ने अपने मंदिर की जमीन पर एक गोशाला बनाकर इन अावारा पशुअाें का संवर्धन कर लिया है।
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दुष्यंत सिंह कहते हैं कि उन्होंने तीन साल पहले गोशाला तैयार कराई थी। इसमें जर्सी नस्ल की दुधारू 150 गायें हैं। इधर, अन्ना मवेशी किसानों की नाक में दम किए हैं। समस्या को लेकर उन्होंने गोशाला बनाकर सेवा ग्रामीणों की मदद कर रहे है।
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अक्तूबर से करीब 10 गांवों के अावारा जानवरों को गोशाला में रखे हैं। इनके ठंड से बचाने के लिए लट्ठे गाड़कर तिरपाल लगवाया है। चरही बनवाई हैं। भूसे का इंतजाम भी कराते है। प्रतिदिन 30 क्विंटल भूसा खिला रहे हैं। क्षेत्र में भूसा न मिलने पर धान का पुआल व ज्वार की कटिया लादकर खिला रहे हैं।
मुस्करा के उपरहका व बंडवा से ज्वार की कर्वी मंगाई है। वहीं, बांदा से धान का पुआल मंगाया है। बताया कि राजस्थान के भरतपुर से कटिया मशीन मंगाई है, जिसे ट्रैक्टर से चलाकर भूसा तैयार इन अावारा पशुअाें का पेट भर रहे हैं। अावारा पशुअाें की देखरेख में उनके छोटे भाई बलवंत सिंह के साथ 14 लोग रहते हैं।