बिकरू कांड के बाद पुलिस एनकाउंटर पर उठे तमाम सवालों पर फॉरेंसिक विभाग (एफएसएल) की रिपोर्ट ने विराम लगा दिया। एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार एनकाउंटर में मारे गए सभी बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायर किए थे। दहशतगर्द विकास दुबे और गुर्गों के एनकाउंटर हुए थे।
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अमर दुबे का एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस व एसटीएफ की टीम पर न्यायिक हिरासत में होने के बाद भी फर्जी एनकाउंटर करने, पकड़ कर गोली मारने सहित कई अन्य आरोप लगे थे। मारा गया विकास दुबे पुलिस अभिरक्षा और प्रभात न्यायिक अभिरक्षा में था। एनकाउंटर की जांच फॉरेंसिक विभाग भी कर रहा था।
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विकास दुबे के साथी प्रभात मिश्रा का एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
फोरेंसिक टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट जांच आयोग और एसआईटी को सौंप दी। रिपोर्ट में पुलिस एनकाउंटर को सही ठहराया है। जांच रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि विकास दुबे पुलिस की गाड़ी पलटने के बाद पुलिस की पिस्टल छीनकर भागा। पीछा करने पर पुलिस टीम पर फायर कर दिया था।
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अमर दुबे एनकाउंटर स्थल
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की जवाबी फायरिंग में विकास दुबे को तीन गोलियां लगीं और वह ढेर हो गया। फारेेंसिक रिपोर्ट में विकास दुबे के हाथ में भी रेसिड्यू मिला। इसी तरह मुठभेड़ में मारे गए प्रेमप्रकाश, अमर दुबे और प्रभात मिश्रा, प्रवीण का एनकाउंटर भी सही पाया गया।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में इनके हाथ मेें गनशॉट रेसिड्यू के निशान मिले। जिससे यह साबित हुआ कि इन लोगों ने भी पुलिस टीम पर फायरिंग की थी। एनकाउंटर में मारे गए बदमाशों के जख्मों में नाइट्रेट नहीं मिला। इससे यह साबित होता है कि पुलिस ने उन्हें नजदीक से नहीं, दूर से गोली मारी थी।