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ब्यूटी पार्लर, सैलून में मालिश कराने वाले हो जाएं सावधान, न्यूरोलॉजिस्ट ने बताये ये खतरे 

Tue, 10 Apr 2018 04:14 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
ब्यूटी पार्लर, सैलून और पहलवान से मालिश कराने से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा रहता है। क्योंकि यहां अप्रशिक्षित लोग मालिश करते वक्त गर्दन भी दबाते हैं। इससे ब्रेन स्ट्रोक (फालिस या लकवा) हो सकता है। ब्यूटी पार्लर में  शैंपू करने के नाम पर सिर काफी देर तक पीछे की तरफ झुकवाना भी ब्रेन स्ट्रोक की वजह बन सकता है। पहलवान से मालिश कराते समय भी गर्दन नहीं झटकने देना चाहिए। यह जानकारी सोमवार को कानपुर में आयोजित आईएमए सीजीपी के 36 वें रिफ्रेशर कोर्स के दूसरे दिन मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली के इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट डॉ.चंद्रिल चुंग ने डॉक्टरों को दी। 
 
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डॉ.चंद्रिल चुंग ने बताया कि जिम में बॉडी बनाने के चक्कर में तमाम युवा स्टेरॉयडयुक्त फूड सप्लीमेंट लेते हैं, इससे भी ब्रेन स्ट्रोक होने के मरीज अस्पताल में आ रहे हैं। दिमाग में खून पहुंचाने वाली नसों में खून का थक्का जम जाता है। ब्रेन स्ट्रोक पड़ने पर हर मिनट में मरीज के 19 लाख न्यूरॉन मरते हैं। इसलिए जितनी जल्दी समुचित इलाज हो जाए, बेहतर है। अब बिना सिर खोले, बिना चीरा लगाए नसों में जमा खून का थक्के हटाए जा सकते हैं। 40 की उम्र के बाद स्ट्रोक ज्यादा पड़ते हैं। इसलिए बच्चों को स्ट्रोक के लक्षण बताएं। 
 
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जानकारी देते डॉक्टर
फास्ट से पहचाने ब्रेन स्ट्रोक
एफ-फेस में परिवर्तन
ए-आर्म (हाथ या पैर या दोनों) में कमजोरी
एस-स्पीच-आवाज में लड़खड़ाहट या न बोल पाना
टी-टाइम-सही समय पर अस्पताल पहुंचे
 

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जानकारी देते डॉक्टर
ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के तरीके
शुगर, बीपी, मोटापे पर नियंत्रण, योग व ध्यान करें, तनाव कम रखें।
 
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ये डॉक्टर मौजूद रहे
मेडिकल कालेज में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएमए अध्यक्ष डॉ. प्रवीण कटियार और संचालन डॉ. नीलम मिश्रा ने किया। इसमें डॉ. एसके कटियार, डॉ. वीसी रस्तोगी, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. पियूष मिश्रा, डॉ. विकास मिश्रा, डॉ. कुणाल सहाय, डॉ. विकास दीक्षित आदि शामिल रहे।
 
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एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल से एमडीआर निमोनिया
फोर्टिस हॉस्पिटल, नई दिल्ली में संक्रामक रोगों के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. विवेक नैनजिया ने बताया कि एंटीबायोटिक के अंधाधुंध सेवन से एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट) निमोनिया होने लगा है। ऐसे मरीजों को तमाम एंटीबायोटिक फायदा नहीं करतीं। उनका इलाज जटिल हो जाता है। उम्र और बीमारियां बढ़ने पर इलाज और भी मुश्किल हो जाता है। आउटडोर में ऐसे मरीजों की मृत्युदर 5 प्रतिशत और इंडोर में 12 प्रतिशत है। बीएलके हॉस्पिटल, दिल्ली के निदेशक डॉ. राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि यदि मरीज को समय से आईसीयू में ले जाया जाए तो उसे बचाना आसान रहता है।
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