फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इटावा के चुनावी दंगल से पहली बार कांग्रेस दूर 

Tue, 07 Feb 2017 10:52 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 3
rahul gandhi
चुनावी इतिहास में यह पहला मौका है जब कांग्रेस इटावा जिले के चुनावी दंगल से बाहर है। कांग्रेस का इतिहास गवाह रहा है कि 1969 व 1980 के विधानसभा चुनाव में मौजूदा तीनों सीटों पर उनका कब्जा रहा है। लेकिन आज उसी कांग्रेस का सपा से गठबंधन के कारण किसी भी सीट पर अपना प्रत्याशी तक खड़ा करने का मौका नहीं मिला। 

 
विज्ञापन

इटावा के चुनावी दंगल से पहली बार कांग्रेस दूर 

2 of 3
राहुल गांधी मंच पर अलग-थलग पीछे अखिलेश यादव के साथ उनके समर्थक
1957 से शुरू हुए चुनावी दंगल में कांग्रेस ने भरथना सीट से विजय यात्रा शुरू की थी। तब यहां से घासीराम ने जीत हासिल की थी। इटावा व जसवंतनगर से कांग्रेस प्रत्याशी हार गए थे। 1962 में कांग्रेस के होतीलाल अग्रवाल इटावा सीट से जीते थे। 1967 में कांग्रेस को तीनों में से कोई सीट नहीं मिली। 1969 में कांग्रेस ने तीनाें सीटाें पर कब्जा किया था। तब इटावा से होतीलाल अग्रवाल, भरथना से बलराम सिंह यादव और जसवंतनगर से विश्वभंर सिंह यादव ने फतह हासिल की थी। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

इटावा के चुनावी दंगल से पहली बार कांग्रेस दूर 

3 of 3
अखिलेश यादव के साथ मंच पर मौजूद राहुल गांधी

1974 में भी कांग्रेस इटावा सीट जीतने में कामयाब रही थी। 1977 में कांग्रेस को फिर झटका लगा था। तीनाें सीटाें पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन इमरजेंसी के विरोध में चली लहर में सभी प्रत्याशी हार गए थे। 1980 में कांग्रेस ने फिर जोरदार वापसी कर तीनों सीटों पर कब्जा जमाया था। इटावा से सुखदा मिश्रा, भरथना से गोरेलाल शाक्य और जसवंतनगर से बलराम सिंह यादव जीते थे। 1985 से लेकर 2012 तक हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का ग्राफ भले ही उतार-चढ़ाव वाला रहा हो, पर पार्टी अपने प्रत्याशी जरूर उतारती रही है, लेकिन इस बार पूरी तरह से चुनाव मैदान से दूर है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें