यूपी के उन्नाव जिले में सदर कोतवाली के अकरमपुर स्थित चिप्स, पापड़ की फैक्टरी में रविवार सुबह करीब आठ बजे फ्रायर प्लांट में शार्ट सर्किट से आग भड़क उठी। फ्रायर प्लांट में प्रयोग हो रहे तेल से आग पूरे प्लांट में फैल गई। आग पर काबू पाने में अग्निशमन विभाग को छह घंटे का समय लग गया। उन्नाव व कानपुर की 8 गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। फैक्टरी मालिक के मुताबिक 15 करोड़ से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
अगर ये हादसा आधे घंटे पहले या आधे बाद होता तो सैकड़ों मजदूरों की जान जा सकती थी। इसकी वजह थी बड़ी तादात में कामर्शियल सिलिंडर का उस जगह पर मौजूद होना। अगर आग एक चिंगारी भी यहां तक पहुंचती तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। जिस समय हादसा हुआ उसके ठीक आधे घंटे बाद दूसरी शिफ्ट में काम करने के लिए मजदूर आने वाले थे। दूसरी ओर, इस आग की जानकारी होते ही अगर अन्य फैक्ट्रियों के मजदूर राहत एवं बचाव कार्य के लिए न आते तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था।
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आग
- फोटो : अमर उजाला
सदर कोतवाली क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र अकरमपुर स्थित एग्रो टेक फैक्टरी में चिप्स व पापड़ बनाने और उनकी पैकिंग का काम होता है। कानपुर निवासी अशोक गर्ग ने बताया कि फैक्टरी मालिक उनके दामाद हर्ष अग्रवाल हैं। उनके पास हिमाया फूड्स की फ्रेंचाइजी है। करीब तीन बीघा क्षेत्र में फैली इस फैक्टरी में सुबह फ्रायर सेक्शन में शार्ट सर्किट हुआ। इससे फ्रायर में प्रयोग किए जा रहे तेल ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते आग ने एसी चेंबर को चपेट में ले लिया।
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फैक्टरी में काम कर रहे श्रमिकों ने पहले निजी संसाधनों से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। फिर हालात बेकाबू होते देख अग्निशमन विभाग को सूचना दी और खुद बाहर निकल आए। आग की सूचना पर उन्नाव, पुरवा, हसनगंज व कानपुर की अग्निशमन विभाग की आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। सुबह आठ बजे भड़की आग पर दोपहर दो बजे के बाद काबू पाया जा सका।
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आग से फैक्टरी में रखा माल व तीन ट्रक लोड माल जल गया। सीओ उमेश त्यागी ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है। कोई जनहानि नहीं हुई है। अशोक गर्ग ने बताया कि आग से दर्जन भर कीमती मशीनें, रिफाइंड, मक्खन, घी, तेल व पैकिंग सामग्री सहित 15 करोड़ से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
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सीएफओ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि फैक्टरी मालिक ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं ले रखी थी। शुरुआती जांच में फैक्टरी में आग से बचाव व बुझाने के संसाधनों का अभाव पाया गया है। यहां पानी की व्यवस्था नहीं मिली है। अग्निशमन यंत्र उपलब्ध थे। पड़ोस की दो अन्य फैक्ट्रियों के हाइड्रेंट प्रयोग किए गए।
सिलिंडर में आग लगती तो होता बड़ा हादसा
चिप्स फैक्टरी में बड़ी मात्रा में कामर्शियल सिलिंडर भी रखे हुए थे। आग भड़कने के बाद फैक्टरी कर्मियों ने कामर्शियल सिलिंडरों को परिसर से बाहर निकालना शुरू किया। आग की सूचना पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने कुल 80 सिलिंडर फैक्टरी से बाहर निकाले। कर्मियों के अनुसार अगर आग इन सिलिंडरों तक पहुंच जाती तो हादसा और बड़ा होता।