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Father's Day Special: कुछ किस्से ऐसे जो आपको गुदगुदाएंगे, कई बार आंख भी नम हो सकती है

Sun, 17 Jun 2018 12:54 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमाे पिक
‘चट्टानों सी हिम्मत और जज्बातों का तूफान लिए चलता है, पूरा करने की जिद से पिता दिल में बच्चों के अरमान लिए चलता है।’ पिता पर लिखी गईं यह पंक्तियां उनके उस संघर्ष को बखूबी बयां करती है जो वे अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने में लगा देते हैं। आज फादर्स डे है और इस मौके पर आज हम आपको कानपुर शहर के कुछ ऐसे पिता से रूबरू  करा रहे हैं जिन्होंने खुद बदहाली की जिंदगी जी लेकिन अपने बच्चों को बुलंदियों पर पहुंचा दिया।




 
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बेटी को सैर कराता पिता - फोटो : अमर उजाला
तानें चुभे नहीं, हिम्मत बन गए 
यूपी- 19 क्रिकेट टीम की खिलाड़ी काकादेव निवासी एकता सिंह अपनी टीम की विराट कोहली हैं। एकता ने पिछले सीजन में सबसे ज्यादा रनों का योगदान दिया था। एकता की सफलता के पीछे उनके पिता राकेश कुमार सिंह का हाथ है। राकेश विकास नगर डिपो में कर्मचारी हैं। वह बताते हैं कि जब उन्होंने अपनी बेटियों को क्रिकेट सिखाना शुरू किया था तो लोग उन्हें ताने मारते थे कि बेटा नहीं है तो बेटियों को ही क्रिकेट सिखा रहे हो। इन्हीं तानों ने उन्हें हिम्मत दी।


राकेश बताते हैं एक क्रिकेट एकेडमी में जब वह अपनी पांच वर्षीय बेटी एकता और छह वर्षीय बेटी अराधना को वहां पर ले गए। पहले तो एकेडमी वालों ने कहा कि बेटियां छोटी हैं लेकिन आग्रह पर उन्होंने उनका एडमिशन ले लिया। राकेश बेटियों को घर पर भी प्रैक्टिस कराते थे। कहते हैं कि उनके पास ज्यादा कमाई तो थी नहीं लेकिन किसी तरह पैसे जोड़कर उन्होंने बेटियों को क्रिकेट किट दिलाई और दोनों बेटियां क्रिकेट में चमक रही हैं। राकेश कहते हैं कि बेटियों ने उनका मान बढ़ा दिया है और ताने देने वालों के मुंह में ताला लगा दिया है।

 
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डेमाे पिक
विकलांग पिता ने बेटे को बना दिया डांसिंग स्टार
अपने डांस से देशभर में नाम रोशन करने वाले नौबस्ता निवासी रितिक दिवाकर के पिता  गौरी शंकर एक हाथ से विकलांग हैं। एक जमाना था जब उनके पास ना रहने को अच्छा घर था और ना ही अच्छे स्कूल में रितिक को पढ़ाने की हिम्मत। रितिक की मां प्राइवेट नौकरी कर घर खर्च चला रहीं थीं। लेकिन आज अपने हुनर के दम पर रितिक ने घर भी बना लिया और केडीएमए जैसे अच्छे स्कूल में पढ़ाई भी कर रहा है। रितिक अपनी सफलता का श्रेय पिता को देते हैं जो उनको हर ऑडिशन में शहर- शहर ले जाया करते थे।


गौरी शंकर बताते हैं कि उनका सपना था कि उनका बेटा जिस भी फील्ड में जाए अच्छा कार्य करे। डांस करने में उसका मन लगता था। रिश्तेदार और पड़ोसी काफी बातें बनाते थे। कहते थे कि मैं अपने बेटे को बर्बाद कर रहा हूं, लेकिन बेटे की इच्छा और उसके सपने के आगे मैंने किसी की नहीं सुनी और आज उस बटे ने इतनी छोटी सी उम्र में हमारा नाम भी रोशन कर दिया और रहने को मकान भी बनवा दिया। रितिक डांसिंग रियालिटी शो सुपर डांसर -2 के फाइनल तक पहुंचा था। प्रभु देवा की आने वाली फिल्म में काम करने वाला है। उसकी पढ़ाई का खर्च वरुण धवन उठा रहे हैं।


 

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डेमाे पिक
मां की भी भूमिका निभाई
ऑर्डनेंस फैक्ट्री कर्मी विनय कुमार मिश्र की पत्नी ने सन् 1994 में दुनिया छोड़ दी थी। उस समय विनय की उम्र 28-29 साल थी। बेटा आशीष तीन साल का था और बेटी डेढ़ साल की। विनय के लिए यह घटना भयानक सदमे की तरह थी। परिवारवालों और रिश्तेदारों ने दूसरी शादी के लिए जोर डालना शुरू कर दिया। यह कहना शुरू कर दिया कि बच्चे बहुत छोटे हैं।

उन्हें पालने के लिए एक मां की आवश्यकता है, लेकिन विनय ने निश्चय किया कि वे ही मां की भूमिका भी निभाएंगे। दूसरी शादी नहीं करेंगे। अब बेटा आशीष बैंक में अफसर है और बेटी की शादी हो चुकी है।

 
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डेमाे पिक
नहीं खलने दी मां की कमी
 केस्को कर्मी राजीव श्रीवास्तव की पत्नी रीता का निधन साल 2009 में हो गया था। उस समय उनके तीनों बच्चे छोटे थे। बेटा सार्थक तीन साल का था। बेटियां श्वेता और एकता भी 10-12 साल की थीं। 40- 41 साल की उम्र में विधुर हो गए राजीव को लोगों ने दूसरा विवाह करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने दूसरा विवाह न करने का संकल्प लिया और बच्चों के पालन-पोषण में जुट गए।

नतीजा यह हुआ कि बेटी श्वेता अब एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ रही है। छोटी बेटी एकता की नौकरी भी एक बड़ी कंपनी में जॉब कर रही है। बेटा सार्थक आठवीं कक्षा में पढ़ रहा है। राजीव ने बच्चों को कभी मां की कमी नहीं खलने दी।
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