कानपुर के घाटमपुर कस्बे के खदरी गांव में जहरीली शराब के सेवन से मरा युवक उमेश (20) सूरत (गुजरात) में नौकरी करता था। 14 फरवरी को उसकी बहन की शादी थी। उसमें शामिल होने के लिए वह अपने भाई वीनस के साथ 9 फरवरी को गांव आया था। उसे 11 मार्च को वापस जाना था। सूरत जाने से पूर्व दोस्तों के अनुरोध पर 10 मार्च को उमेश ने गांव के रामशंकर पासी की दुकान पर दारू-मुर्गा की पार्टी रखी थी।
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जिसमें उसका पिता रामबाबू भी शामिल रहा था। गांववालों के मुताबिक, दारू पार्टी ही पिता-पुत्र की मौत की वजह बनी। पार्टी में प्रयोग की गई जहरीली शराब गांव के ही विमल कुशवाहा की दुकान से खरीदी गई थी। मंगलवार को जैसे ही उमेश और उसके पिता रामबाबू की मौत की सूचना खदरी गांव पहुंची तो लोग हंगामा करने लगे।
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भीड़ ने गांव के प्राथमिक विद्यालय के गेट के आगे बनी विमल कुशवाहा की परचून की दुकान पर पथराव और तोड़फोड़ की। पथराव और बवाल की सूचना पर एसपी यातायात सुशील कुमार, आईपीएस आशीष लांघे और सीओ शैलेंद्र सिंह गांव पहुंचे। आसपास के कई थानों का पुलिस बल और पीएसी को बुलवा लिया गया। अधिकारियों ने शांति बनाए रखने की अपील की।
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खदरी गांव में जहरीली शराब बेचने के मुख्य आरोपी विमल कुशवाहा की दुकान और उसके दो मंजिला मकान की तलाशी के दौरान पुलिस एक भी शीशी शराब बरामद नहीं कर पाई है। लेकिन, तलाशी के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य जरूर सामने आए हैं। मंगलवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की मौजूदगी में पुलिस अधिकारियों ने आरोपी के मकान का ताला खुलवाया।
जहां एक कमरे में प्लास्टिक की कुछ बोरियां और ईंधन जमा था। उसे हटने पर बाक्सनुमा सीमेंटेड तहखाना मिला। तहखाने की तलाशी के दौरान कोई बरामदगी नहीं हुई। इधर, विमल के मकान के बगल में स्थित खंडहर में बड़ी मात्रा में शराब की जली हुई बोतलें बरामद हुईं। अनुमान है कि आरोपियों ने रातों-रात सुनसान खंडहर में माल को आग के हवाले करके नष्ट कर दिया है।