हल्कू पशुपालन से अपना पालन पोषण करता है। उसके परिवार में करीब 90 भेड़ और बकरियां है। जिनकी वह स्वयं सेवा करके जंगल में चराने जाता है और शाम को वापस घर लाता है। 'आषाढ़ की रात' ने हल्कू की खुशियां छीन ली। जानें क्या है पूरा मामला...
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बकरियों की मौत
यूपी के महोबा जिले में ग्राम भटेवरा निवासी हल्कू पुत्र कन्हैयापाल की एक साथ 83 बकरियों की मौत एक पहेली बन गई है। इस घटना के बाद लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। एक साथ हुई बकरियों की मौत के बाद पशुमालिकों का बुरा हाल है।
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बकरियों की मौत
रोज की तरह मंगलवार की देर शाम को वह सारी बकरियां घर लाया और पशुबाड़े में बंद कर दी। सुबह पशुमालिक हल्कू की पत्नी पशुबाड़े में साफ सफाई करने पहुंची तो 83 भेड़ और बकरियां मृत पड़ी थी। यह देखकर महिला के होश उड़ गए। बकरियों को मृत देख महिला रोने पीटने लगी। जिससे भारी भीड़ जमा हो गई। बकरियों की मौत से हल्कू की रोजी रोटी ही छिन गई। भेड़ बकरियों के सहारे हल्कू का परिवार चल रहा था।
हल्कू ने कोतवाली कुलपहाड़ में तहरीर देकर विरोधियों पर जहर खिलाकर भेड़ बकरियों को मारे जाने का आरोप लगाया। प्रशासनिक हस्तक्षेप के चलते सभी भेड़ बकरियों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। कोतवाली प्रभारी कुलपहाड़ सतीश चंद्र शुक्ला का कहना है कि तहरीर मिल गई है। जांच उपरांत कार्रवाई की जाएंगी।
तीन सदस्यीय पशु चिकित्सकों की टीम ने भेड़ और बकरियों का पोस्टमार्टम किया। पशु चिकित्सक रणविजय सिंह ने पीएम रिपोर्ट में बताया कि रात में पानी बरसने से वातावरण में नमी बढ़ गई। जिससे उमस बढ़ने से बंद कमरे में अमोनिया गैस बन गई। कमरे में हवा के आवागमन के लिए कोई खिड़की नहीं थी। इसलिए दम घुटने से भेड़ बकरियों की मौत हो गई। घटना में करीब चार लाख रुपये का नुकसान होने से पशुपालक परेशान है।