यूपी के कानपुर देहात जिले में शिवली कस्बा शिवली के जागेश्वर मंदिर का शिवलिंग भक्तों द्वारा स्थापित नहीं किया गया है। इसको स्वयंभू माना जाता है। क्योंकि यह स्वयं उत्पन्न हुआ था। इस शिवलिंग के बारे में भक्तों की मान्यता है कि इसका दूसरा छोर पाताल तक जाता है। इसी शिवलिंग के नाम पर कस्बा का प्राचीन समय में नाम शिवली पड़ा था। कस्बा के अलावा भी आसपास के एक दर्जन गांव के साथ में शिवली शब्द आज भी जुड़ा है।
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शिवली का जागेश्वर मंदिर का शिवलिंग
कस्बा शिवली के उत्तर में पांडव नदी के किनारे प्राचीन समय में बड़ा घना जंगल हुआ करता था। किंवदंती है कि जंगल में बंजारों की एक गाय ऊंचे टीले पर स्वत: दूध निकाल देती थी, बंजारों ने जब जब खुदाई की तो शिवलिंग निकला। जागेश्वर मंदिर के पुजारी राकेश पुरी ने बताया शिव मंदिर के शिवलिंग पर भक्तों की अगाध आस्था है। ऐसी मान्यता है कि इस शिवलिंग का दूसरा छोर पाताल को छूता है। कानपुर का इतिहास पुस्तक में इस मंदिर के बारे में वर्णन है।
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शिवली का जागेश्वर मंदिर का शिवलिंग
मंदिर के भक्त महेश पांडे, राजू शुक्ला, प्रमोद शर्मा, शिवकुमार तिवारी ने बताया कि मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। मंदिर के वार्षिकोत्सव व महाशिवरात्रि पर विशाल धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होता है। नगर पंचायत शिवली के अलावा जैतपुर शिवली, सिंहपुर शिवली, रामपुर शिवली, जुगराजपुर शिवली, ढाकन शिवली, विरतियाना शिवली, हीरामन शिवली, त्योरियाना शिवली के साथ शिवली नाम शिवलिंग की प्राचीनता को दर्शाते हैं।
क्षेत्र के अन्य प्रसिद्ध शिव मंदिर
कडऱी हनुमान मंदिर में भागवतेश्वर, शोभन मंदिर के नर्मदेश्वर, बैरी के महकालेश्वर, मैथा के शंकर मंदिर, लालपुर शिवराजपुर का पूर्णकामेश्वर मंदिर, हर्दियानाला का पागल बाबा शिव मंदिर, शिवली के महाकालेश्वर पंचमुखी शिव मंदिर्र व रामेश्वर आदि प्रमुख शिव मंदिर हैं।