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PHOTOS: कवि सम्मेलनः इक समंदर मचलता तो मुझमें भी है, सुन...झूम उठे श्रोता

Sat, 29 Sep 2018 10:33 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
कानपुरः ‘सज धज कर गोरी चली, लेकर हरि का नाम, आशा की थी राम की, मिल गये आशाराम’.. हास्य कवि पदम अलबेला ने जब यह पंक्तियां पढ़ीं तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लाजपत भवन में केजी तिवारी की स्मृति में सुमिरन संस्था की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं पेश की। 


 
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कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
हास्य कवि अरुण जैमिनी ने ‘पुलिस के रंगरूटों का दस्ता चाहिए था नया, हरियाणे का राधे श्याम भी इंटरव्यू देने गया, इंटरव्यू में पूछा गया सिर्फ एक सवाल, राधे ने बना दिया सवाल को बवाल’ रचना सुनाई तो श्रोता झूम उठे। मुरली परिहार ने ‘सोचा मैने भी गीत लिखूं, नदिया जैसा संगीत लिखूं, सूरज जैसी गर्मी लिख दूं, चंदा जैसी मैं शीत लिखूं’ काव्यपाठ क ह वाहवाही लूटी।

 
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कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
अना देहलवी ने ‘अपनी महफिल में मुझे देखकर हैरान न हो, आपको अपना समझकर मैं यहां आई हूं, और तो कुछ मेरे हमराह नहीं हैं लेकिन आपके वास्ते खुशबू ए वतन लाई हूं...’ गजल सुनाकर समां बांध दिया। इसके बाद विनोद श्रीवास्तव ने ‘धर्म छोटे-बड़े नहीं होते, जानते तो लड़े नहीं होते, चोट तो फूल से भी लगती है, सिर्फ पत्थर कड़े नहीं होते...’ गीत पेश किया।

 
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कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
सरिता शर्मा ने ‘लहर जैसी चपलता तो मुझमें भी है, अनकही इक विकलता तो मुझमें भी है, मैं नदी हूं किनारों में सिमटी हुई, इक समंदर मचलता तो मुझमें भी है...’ गीत सुनाया। इसके अलावा जमुना प्रसाद उपाध्याय, शिव कुमार अर्चन, राजेंद्र पंडित ने भी काव्य पाठ किया। इस दौरान सभी रचनाकारों को सम्मानित भी किया गया। यहां पर महापौर प्रमिला पांडेय, विधायक महेश त्रिवेदी के अलावा संस्था के आर नाथ मिश्रा, आकर्षण तिवारी, धर्मप्रकाश गुप्त, राजेश श्रीवास्तव, शैलेश त्रिपाठी आदि मौजूद थे। 
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