बुंदेलखंड की तस्वीर
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अब वे अंगूठा नहीं लगातीं। गांव में नशामुक्ति अभियान भी चला। 135 महिलाओं को दिव्यांगता और विधवा पेंशन का लाभ मिल रहा है। मजदूरों को बेटियों की शादी के लिए आर्थिक मदद मिल रही है। छह हजार आबादी में 2242 वोटर हैं। समस्याएं भी हैं गांव के अनिल पटेल और नरेंद्र शुक्ला ने बताया कि नलों से अक्सर दूषित पानी आता है। गोशाला है, लेकिन वहां चारा-पानी का पुख्ता इंतजाम नहीं है। छुट्टा जानवर फसल नष्ट कर देते हैं।
हाईस्कूल के बाद पढ़ाई का इंतजाम नहीं है। लड़कियों के इंटर कालेज को भी मंजूरी मिल गई है। होम्योपैथिक अस्पताल के लिए जमीन आवंटित हो गई है। एटीएम भी लगवाने की कोशिश है। अच्छे काम के लिए दो बार सीएम से सम्मान और रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड भी मिल चुका है। - दिव्या त्रिपाठी, निवर्तमान प्रधान
रहते यूपी में, जमीन एमपी में: सेमरिया और आसपास गांव के कई लोग रहते यूपी में हैं लेकिन उनकी जमीन एमपी में हैं। बारिश, बाढ़, आग या अन्य कारणों से फसल नष्ट हो जाए तो मुआवजा नहीं मिलता क्योंकि निवास यूपी में है तो हक नहीं है।