चुनाव नतीजे की चिंता ने चेहरे से होली के रंगों की रंगत उड़ा दी है। प्रत्याशी और उनके नजदीक समर्थकों को होली की गुझिया से ज्यादा जीत की मिठाई का बेताबी से इंतजार है। होली के इंतजामों में मतगणना की तैयारी भारी पड़ रही है।
23 फरवरी को मतदान के बाद 11 मार्च को होने वाली मतगणना के 15 दिन प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के बड़ी बेसब्री से बीते। रोजाना जीत-हार के गुणा-भाग लगाए जाते रहे। मतगणना के ठीक एक दिन बाद 12 मार्च को होलिका दहन है। 13 और 14 को होली की धूम रहेगी। बुंदेलखंड में दोनों दिन धूमधाम से होली मनाई जाती है। लेकिन अबकी चुनाव लड़े प्रत्याशी और उनके नजदीकी समर्थकों का पूरा ध्यान मतगणना पर ही टिका रहा।
होली की तैयारियां पीछे रह गईं। लगभग सभी प्रत्याशी अपने मतगणना एजेंट की सूची बनाने और निर्वाचन कार्यालय से उनके परिचय पत्र हासिल करने में जुटे हैं। उन्हें इसके आगे होली नहीं सूझ रही। ऐसे में जीतने वाले प्रत्याशी को छोड़कर शेष सभी उम्मीदवारों के चेहरों पर मतगणना के बाद उदासी का रंग चढ़ा नजर आएगा। कुछ तो हार के गम में शायद होली ही न मनाएं।