यूपी के इटावा जिले में एक बीमार महिला अस्पताल पहुंचती हैं। अस्पताल तक पहुंचने में उसकी मदद स्थानीय आशा करती है। इसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ही कहेंगे कि बीमार महिला को चार माह तक गर्भवती मानकर टीकाकरण भी कर दिया। हालत बिगड़ने पर सीएचसी राजपुर चकननगर के जिम्मेदारों ने हाथ खड़े कर दिए। महिला को परिजनों ने जिला मुख्यालय के प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया तब बीमारी का पता चला। पूरा मामला जानकर घरवाले अचरज में आ गए...
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टीकाकरण कार्ड, पीड़ित महिला
- फोटो : अमर उजाला
बीहड़ का ब्लॉक क्षेत्र चकरनगर के शेरगढ़ गांव में रहने वाली दीक्षा देवी पत्नी राहुल कुमार की तबीयत खराब होने पर स्थानीय आशा की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर चकरनगर पहुंचीं। जहां पर स्वास्थ्य कर्मियों ने गर्भवती मानकर जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए महिला को 14 अगस्त 2018 को पहला टीकाकरण किया। साथ ही गर्भवती होने का कार्ड भी जारी कर दिया था। आशा की ओर से एक गर्भवती महिला को मिलने वाले प्रत्येक पोषण भी उपलब्ध कराए गए।
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पीड़ित पति-पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार को महिला की हालत गंभीर होने पर आशा उसे दोबारा सीएचसी राजपुर लेकर पहुंची। डॉक्टरों ने महिला को ड्रिप और दवाइयां दे दी गईं। इसके बाद आशा ने महिला का परिजनों के सुपुर्द कर दिया। महिला ने बताया कि उससे 250 रुपये भी वसूले गए हैं। रात में महिला की हालत गंभीर होने पर घरवाले उसे जिला मुख्यालय स्थित नर्सिंग होम ले गए। डॉक्टर ने महिला को अल्ट्रासाउंड व आदि जांचकर बताया कि महिला गर्भवती नहीं है। इसे पेट संबंधी बीमारी। इसे सुनकर घरवाले अचरज में आ गए।
आखिर स्वास्थ्य विभाग ने बीते चार माह तक महिला को गर्भवती मानकर उपचार किस आधार पर किया है। जिसको लेकर के संबंधित सीएचसी प्रभारी से बात की। उन्होंने कहा कि ऐसा तो अक्सर होता रहता है। यह कोई बड़ी बात नहीं है। पीड़ित महिला के पति ने उक्त मामले में मुख्यमंत्री प्रदेश सरकार को शिकायती पत्र भेजकर दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है। इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी अनिल अग्रवाल ने बताया मामले की जानकारी संबंधित कर्मियों से करके लापरवाह कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।