बिठूर घाट का खौफनाक मंजर
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सही तो तब होती जब बिना ऑक्सीजन अस्पताल की देहरी पर दम तोड़ने वालों, बेड न मिलने से सड़कों पर मरने वालों और घरों में तड़प तड़प कर मरने वालों का आंकड़ा भी शामिल कर लिया जाता। स्वास्थ्य विभाग इस सवाल के जवाब में मौन है। हकीकत तो सिर्फ श्मशान घाट में लगी चिताओं की लंबी लाइनें ही बयां कर रही हैं।
व्यवस्था के मुताबिक वही मौतें रिकार्ड में दर्ज हो पाती हैं जो अस्पतालों में हुईं। निश्चित रूप से कुछ मौतें बिना जानकारी के भी हुई होंगी। ये महामारी का दौर है। शासन प्रशासन का प्रयास है कि सभी संक्रमितों को बेहतर इलाज मिले। इसके लिए युद्धस्तर पर प्रयास कर रहे हैं। हमारी व्यवस्था इस तरह की महामारी से निपटने के लिए तैयार नहीं थी। इसमें हर व्यक्ति का सहयोग चाहिए। सभी को कोविड गाइड लाइन का पालन सख्ती से करना होगा। - आलोक तिवारी, जिलाधिकारी