शराब की दुकानों पर पब्लिक का गुस्सा फूट रहा है, लोग कह रहे हैं कि शराब ठेकों ने अराजकता की अति कर दी है। कोई नियम-कानून इन पर लागू नहीं होता। आरोपों में दम है, दरअसल हकीकत में शराब के सौ खून माफ हैं। कानून को दरकिनार कर किसी भी शराब की दुकान का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से लाइसेंस तक नहीं बना है।
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नहीं भरा गया सैंपल
छोटे-मोटे खाद्य और पेय पदार्थों का कारोबार करने वालों के प्रतिष्ठानों पर जाकर अक्सर सैंपल भरे जाते रहे लेकिन कानपुर जिले में हर रोज हजारों लीटर शराब पिए जाने के बावजूद एक भी बार शराब का सैंपल नहीं भरा गया। शराब के सैंपल भरे जाने का मामला शासन में हर बार दबा दिया गया। फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के आदेश को छह साल से ठेंगा दिखाया जाता रहा।
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फाइल कहां दब गई
फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसआई) ने सभी तरह के खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ की बिक्री पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का लाइसेंस अनिवार्य किया है। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 पांच अगस्त 2011 से लागू हुआ है। तब से लेकर आज तक किसी भी शराब की दुकान का लाइसेंस नहीं बना है। शराब पीने से कई जिलों में लोगों की मौत के बाद तत्कालीन एडीएम सिटी अविनाश सिंह ने शराब के सैंपल भरने का मामला उठाते हुए जिलाधिकारी को शासन से अनुमति लेने का प्रस्ताव दिया था। शराब माफिया की ताकत के कारण पता नहीं यह फाइल कहां दब गई।
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इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता
कानपुर के एडीएम सिटी केपी सिंह ने बताया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड (लाइसेंसिंग रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेसेज) रेगुलेशन 2011 में हर खाद्य और पेय पदार्थ के कारोबार पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का लाइसेंस अनिवार्य है। इस बारे में कुछ नहीं कह सकता कि अभी तक शराब की दुकानों के लाइसेंस क्यों नहीं बनवाए गए। इस मामले पर कानूनी राय लेकर जल्द कार्यवाही की जाएगी।
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सैंपल न भरने से मिलावट
सैंपल न भरे जाने के कारण ही शराब में मिलावट का बहुत बड़ा बाजार खड़ा हो गया है। आबकारी विभाग के मुताबिक शहर में हर रोज करीब 25 हजार अंग्रेजी शराब की बोतलें, 40 हजार बीयर की बोतलें और 50 हजार लीटर देशी शराब की बिक्री होती है। इतनी बड़ी खपत के बावजूद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कभी भी शराब या बीयर के सैंपल नहीं भरे हैं।
आए दिन होती रहती मौतें
मिलावटी शराब पीने से त्योहारों विशेषकर होली पर कई जिलों में लोगों की मौतें होती रहती हैं। फिर भी कानूनन अधिकार मिला होने के बावजूद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने शराब के सैंपल नहीं भरे। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग व्यक्तिगत रूप से पब्लिक को मिलावट की आशंका पर एक हजार रुपये फीस भरकर सैंपल की जांच कराने का अधिकार देता है लेकिन दवाब में शराब पर यह नियम गैर कानूनी ढंग से लागू नहीं किया जाता है।