कानपुर में शांतिदूत धर्मरत्न पंडित देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि भगवान राम का मंदिर बनाने में इतनी तकलीफ क्यों हो रही है। हिंदू मक्का मदीना में नहीं, अयोध्या में मंदिर बनाने की बात कर रहा है। राम किसी के जैसे नहीं, बल्कि राम अपने आप में ही राम हैं। भगवान श्रीराम हिंदुओं के ही नहीं अपितु पूरे विश्व के आदर्श हैं। राम की उपमा नहीं दी जा सकती है।
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कलश यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
जैसे सागर जैसा कोई नहीं है वैसे ही राम जैसा भी कोई नहीं है। वह बुधवार को विश्व शांति सेवा समिति कानपुर एवं विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट दिल्ली की ओर से मोतीझील प्रांगण में आयोजित श्रीरामकथा में प्रवचन कर रहे थे।
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पंडित देवकी नंदन ठाकुर की श्रीरामकथा
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि श्रीराम ने भाई के लिए राज-पाठ छोड़ा। सौतेली मां के आदेश पर 14 वर्ष के वनवास पर गए। ऊंच-नीच को परे रखकर शबरी के जूठे बैर खाए। आज उन्हीं श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए हमें कोर्ट और कचहरी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हमने आपसे कभी नहीं पूछा आपके भगवान कहां से आए थे तो आप हमसे ये सवाल क्यों करते हो।
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कलश यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
अगर आपमें भाईचारा की बात है तो हमें अयोध्या के साथ मथुरा में भी श्रीकृष्ण और काशी में भोलेनाथ का मंदिर बनाकर दें। हमारे लिए तीनों ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पुरुषों का जीवन श्रीराम के जैसा हो और स्त्रियों का जीवन माता सीता जैसा हो। धर्म पर चलने से ही शांति और समृद्धि मिलेगी। धर्म के मार्ग पर चलकर ही आपका वंश फले फूलेगा।
जहां अधर्म के मार्ग को अपनाया तो जीवन में हमेशा अशांति रहेगी। इससे पहले महापौर प्रमिला पांडेय और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने देवकी नंदन के साथ दीप प्रज्जवलित कर श्रीरामकथा की शुरुआत की। उधर, सुबह काली मठिया हनुमान मंदिर 80 फिट रोड से कलश यात्रा निकली। इसमें 551 महिलाएं कलश लेकर अशोक नगर होते हुए मोतीझील प्रांगण पहुंची। इसमें आकर्षण का केंद्र बनी राम दरबार और राधाकृष्ण की झांकी।