उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले का 'पलरी गांव' इन दिनों खासा चर्चाओं में है। बीते चार माह में पूरे गांव की ऐसी दशा-दिशा बदली कि हर किसी की जुबान पर इसका नाम है। यह गांव चार महीने पहले तक चहल-पहल से भरपूर नजर आता था। फिर ऐसा क्या हुआ कि गांव का रूप एक ही झटके में बदल गया। केवल यही नहीं, रूप भी ऐसा बदसूरत कि गांव का नाम ही 'भूतिया गांव' पड़ गया।
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चार माह में गांव हुआ मुर्दा
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अब तो बीना किसी आवाज और चहल-पहल के पलरी गांव मुर्दा सा नजर आने लगा है। गांव की महिलाएं और बच्चे शाम होते ही खौफज़दा नजर आते हैं। ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने में डरने लगे हैं।
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घरों से निकलने में डरने लगे हैं ग्रामीण
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बेजान हुए इस गांव का कारण है चार माह से फुंका पड़ा एक ट्रांसफार्मर। इसी के चलते पूरा गांव बदहाली के दिन जीने को मजबूर है। अमोलर विकास खंड तालग्राम के पलरी गांव में ग्रामीणों ने ठेकेदार पर ट्रांसफार्मर न रखने का आरोप लगाया है। पलरी गांव के सोनेलाल, सीताराम, परशुराम, हाकिम सिंह, ब्रजेंद्र सिंह, टीकाराम आदि का कहना है कि गांव में चार माह पहले ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए घरेलू आपूर्ति से ट्रांसफार्मर लगाया गया था। इसके फुंक जाने के कारण गांव में चार माह से बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
बच्चे रात के समय पढ़ाई नहीं कर पाते। लोगों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इतने अंधेरे में महिलाएं चूल्हा-चौका तक ठीक तरह से नहीं कर पाती। हालांकि वे इस विधी में निपूर्ण समझी जाती है। गांव में पसरे रात के काले रंग ने सब फीका कर दिया है।