अब शादी समारोह में आचार्यों की दक्षिणा भी काफी बढ़ गई है। बड़ी सहालग के दिनों में एक-एक आचार्य 5100 से लेकर 21000 रुपये तक अपनी दक्षिणा ले रहे हैं। खास बात यह है कि फेरे व अन्य रस्मों को पूरा कराने केलिए अपने साथ वह एक अटेंडेंट भी लेकर आ रहे है।
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तिलक से लेकर शादी कराने तक 5100 से 21000 रुपये तक ले रहे आचार्य
कानपुर जवाहर नगर के आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि जून व जुलाई के लिए जनवरी-फरवरी में ही बुकिंग हो जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण होता है कि साल भर आचार्य जप, तप भी करते है और बड़ी संख्या में महामृत्युंज जप भी होता है। जिसके चलते पूरे साल की बुकिंग होती है। इन जापों में आचार्यों की अच्छी कमाई होती है। इस कारण वह सहालग में जाने के लिए बड़ी दक्षिणा मांगते है। अब तिलकोत्सव में दो आचार्यों की दक्षिणा 5100 रुपये है। जबकि विवाह में 11000 रुपये हो जाती है। आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- अब आचार्यों में सिल्क पहनने का कल्चर है ...
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बड़े आचार्य पहले से ही विवाह कराने की बुकिंग पर
अब पहले की तरह आचार्य कॉटन का धोती-कुर्ता नहीं पहनकर आते है। वह भी वर-वधू की तरह सिल्क और डिजाइनर कुर्ता पायजामा पहनकर विवाह समारोह में आते है। ताकि कोई उन्हें 100 या 200 वाला आचार्य न समझे। आचार्य संदीप का मानना है कि फर्स्ट इम्प्रेशन इज लास्ट इम्प्रेशन। अर्थात पहला प्रभाव ही मनुष्य पर छाप छोड़ता है। यदि वस्त्र अच्छे नहीं पहनेंगे तो दक्षिणा भी अच्छी नहीं मिलेंगी।
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कानपुर के पंडित डा. आदित्य पांडेय का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में पंचांग का अत्याधिक महत्व है। पंचांग के अनुसार ही सहालगों गेस्ट हाउस, कैटरिंग, ज्वैलर्स, परिधान, फोटोग्राफी, फर्नीचर, बर्तन, टूर एंड ट्रैवल्स आदि की बुकिंग होती है। इसी तरह आचार्यों की उपलब्धता में भी बदलाव आ गया है। जिस प्रकार सावन मास, दीपावली, अक्षया तृतीया में आचार्यों की डिमांड बढ़ जाती है। उसी तरह बड़ी सहालगों में आचार्यों की अधिक डिमांड हो जाती है। इसी के साथ उनकी दक्षिणा में 5 से 7 गुणा बढ़ोत्तरी हो जाती है। पहले शादी में यही आचार्य 251 से 501 रुपये तक लेते थे पर अब यही दक्षिणा 5100 से 21000 रुपये तक हो गई है।