बिकरू कांड में मारे गए कुख्यात विकास दुबे को घटना से पहले नगदी और रुपये पहुंचाने वाले आरोपी की जमानत शुक्रवार को खारिज कर दी गई। उस पर आरोप है कि उसने जय बाजपेई के साथ मिलकर इस घटना में सहयोग किया था। इन आरोपों में चौबेपुर के तत्कालीन एसओ और सब इंस्पेक्टर की भी जमानत खारिज हो चुकी है।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
दो जुलाई को चौबेपुर के बिकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर फायरिंग की गई थी। सीओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। आर्य नगर कानपुर के प्रशांत शुक्ला उर्फ डब्बू को पुलिस ने घटना के पहले विकास को रुपये व कारतूस पहुंचाकर सहयोग करने में आरोपित किया है।
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आरोप है कि डब्बू ने जय बाजपेई के साथ मिलकर विकास का घटना में सहयोग किया है। इसकी सुनवाई स्पेशल जज डकैती राम किशोर की अदालत में चल रही है। डब्बू के अधिवक्ता ने जमानती प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इसमें शुक्रवार को सुनवाई हुई।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि प्रशांत शुक्ला उर्फ डब्बू को सिर्फ जय बाजपेई के बयानों के आधार पर मुल्जिम बना दिया गया है। घटना में वह नामजद नहीं था। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रशांत मिश्रा ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त डब्बू ने कारतूस व रुपये पहुंचा कर घटना में सहयोग किया।
घटना बड़ी व गंभीर अपराध है। कहा कि अपराधियों का सहयोग करने में ही तत्कालीन एसओ विनय तिवारी, व दारोगा केके शर्मा समेत अन्य आरोपियों की जमानत खारिज हो चुकी है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।