जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 जवान शहीद हो गए। इनमें से एक जवान उन्नाव जिले का भी था। शनिवार को जब तिरंगे से लिपट कर शहीद अजीत का पार्थिव शरीर पहुंचा तो हर आंख से आंसू छलक गया। शहर से अंतिम यात्रा निकली। सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान भारत माता की जय, शहीद अजीत अमर रहे , वन्दे मातरम की गूंज शहर की हवाओं में घुल रही थी।
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उन आंसुओं में फक्र भी था और दर्द भी नजर आया। शहीद अजीत के अंतिम दर्शन के लिए गांव के गांव उमड़ पड़े। सब धरती के इस लाल की एक झलक पाने के लिए बेताब नजर आए। अजीत के तिरंगे से लिपटे हुए पार्थिव शरीर को देखने के लिए कोई छत पर चढ़ा था तो किसी ने अपनी कार को ही छत बना लिया। सांसद साक्षी महाराज, सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
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हर कोई उसे एक बार छूना चाहता था। शहादत के इस मौके पर प्रदेश सरकार के मंत्री ब्रजेश पाठक भी पहुंचे। शहर के लोक नगर निवासी अजीत कुमार (38) पुत्र प्यारे लाल सीआरपीएफ की 115वीं बटालियन में तैनात थे।
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गुरुवार शाम वह सीआरपीएफ के काफिले के साथ जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहे थे। तभी पुलवामा अवंतीपोरा में गोरीपोरा में एक आतंकी ने विस्फोटक से भरी कार को जवानों की बस से भिड़ा दिया। तेज विस्फोट में बस में सवार कई जवान शहीद हो गए। जिनमें अजीत कुमार भी शामिल थे। देर रात जम्मू हेडक्वार्टर से परिजनों को सूचना मिली।
गुरुवार देर रात छोटे भाई रंजीत के पास फोन आया तो परिवार में कोहराम मच गया। अजीत चार दिन पहले ही एक महीने की छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर गए थे। शहादत की खबर फैलते ही क्षेत्र शोक में डूब गया। अजीत के छोटे भाई रंजीत ने बताया कि आतंकी हमले की खबर वह टीवी पर देख रहे थे।