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जानें, कद्दावर सपा मंत्री की सरपरस्ती में इस सरकारी अफसर की पूरी ‘भ्रष्टलीला’

Tue, 25 Apr 2017 05:26 PM IST
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
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केशव लाल
सपा सरकार में एडिशनल कमिश्नर केशव लाल की तूती बोलती थी। यादवलैंड के सपा के एक कद्दावर मंत्री से इनकी नजदीकियां रहीं हैं। प्रदेश में जब-जब सपा सरकार रही केशव लाल अपने से ऊंचे ओहदे वाले अफसरों को दरकिनार कर काम करते रहे। यही वजह रही कि ट्रांसफर-पोस्टिंग तक में केशव लाल का सिक्का चलता था।  
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केशव लाल
विभागीय सूत्र बताते हैं कि सपा के कद्दावर मंत्री के कहने पर केशव लाल को हर बार मनचाहा शहर और मनचाहा काम मिला। सरकार तक पहुंच की हनक में केशव लाल अपने समकक्ष अधिकारियों की एक नहीं चलने देते थे। दो साल से इनकी तैनाती कानपुर जैसे औद्योगिक और वाणिज्यिक उर्वरता वाले शहर में है।
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डेमो पिक
कानपुर जोनल कार्यालय में अपने दो साल के कार्यकाल में इन्होंने समकक्षों की एक नहीं चलने दी। एसआईबी और सचल दल जैसे कमाऊ विंगों की कमान अपने हाथ में रखी। वाणिज्य कर कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों की घुसपैठ इन्हीं की वजह से चल रही थी। 

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डेमो पिक
सूत्रों के अनुसार केशव लाल काली कमाई का हिस्सा विभाग के पांच करीबी अधिकारियों में बांटते थे। इस वजह से जोनल कार्यालय के एक बड़े अफसर से इनकी तनातनी रहती थी। दीपावली के समय यह तनातनी सामने आई थी। उक्त बड़े अफसर ने केशव लाल को चुनौती देते हुए समानांतर सचल दल इकाई का गठन कर दिया था। 
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डेमो पिक
शहर में अवैध कारोबार पर एक नजर 
-5000 करोड़ का मौरंग कारोबार 
-5,000 करोड़ की अवैध व फर्जी फर्मे 
-एक लाख से ज्यादा अपंजीकृत वाणिज्यिक प्रतिष्ठान
-1000 से ज्यादा अपंजीकृत ट्रैवल्स एजेंसियां
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डेमो पिक
नए प्रावधानों ने आसान किया आयकर का काम 
आयकर अफसरों के छापे अब शत प्रतिशत सफल हो रहे हैं। लोगों में जिज्ञासा होने लगी है कि आयकर अफसर जहां जाते हैं, वहां कुछ न कुछ मिल ही जाता है, ये कैसे संभव होता है। अमर उजाला ने पड़ताल की तो सामने आया कि तकनीक और नए नियम-प्रावधानों ने आयकर अफसरों का काम आसान किया है। पैन आधारित व्यवस्था में बैंक खातों का एक दूसरे जुड़ना, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, नकदी का आहरण अपने आप चुगली कर देता है। नोटबंदी के बाद इसमें तेजी आई है। पहले आयकर अफसरों को सूचनाएं जुटाने में काफी समय लगता था। 
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डेमो पिक
हर किसी का खाता देख रहा आयकर 
जो यह समझता है कि उसके खाते में जमा धनराशि की किसी को जानकारी नहीं तो वह भ्रम में है। दरअसल आयकर विभाग को हर छोटे- बड़े बैंक खाते के बारे में पता है। विभाग यह भी जानता है कि एक व्यक्ति के कितने और किन- किन बैंकों में खाते हैं। जहां कुछ भी अप्रत्याशित लगता है, वहां विभाग का खुफिया विंग एक्टिव हो जाता है।  जब यह पुष्ट हो जाता है कि दाल में कुछ काला है तो छापामार कार्रवाई होती है। 
 

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डेमो पिक
खुफिया सॉफ्टवेयर में दर्ज होते हैं लेनदेन 
आयकर विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि नोटबंदी के बाद से रुपये का लेनदेन छिपाना अब आसान नहीं रहा। देश के सभी बैंक एक- दूसरे से जुड़ गए हैं। बैंकों को निर्देश हैं कि कोई भी अप्रत्याशित लेनदेन हो तो सूचना आयकर विभाग को दें। इसके अलावा वित्त मंत्रालय के खुफिया विभाग फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) के सॉफ्टवेयर में सभी बैंकिंग लेनदेन ऑटोमेटिक आ जाते हैं, उन्हें राशि के हिसाब से वर्गीकृत कर स्थानीय आयकर अफसरों को भेजा जाता है। 

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डेमो पिक
पैन व आधार ने बदला स्वरूप 
दो लाख से अधिक की ज्वैलरी खरीद पर पैन, 50 हजार से अधिक डिपॉजिट पर पैन, खातों के पैन व आधार नंबर से जुड़ने के अलावा रजिस्ट्री में आधार नंबर इस्तेमाल से व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। व्यक्ति की आर्थिक गतिविधियां कच्चे चिट्ठे की तरह सामने आ रही हैं। 

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डेमो पिक
600 साल लगते 100 करोड़ कमाने में 
कानपुर के एडिशनल कमिश्नर केशव लाल अपनी पैदाइश के पहले ही दिन से यदि सैलरी के बराबर कमा रहे होते और इसमें से एक रुपये भी खर्च नहीं करते तो 100 साल में महज 17 करोड़ रुपये ही जोड़ पाते। यानी 100 करोड़ कमाने में इन्हें 600 साल लग जाते। हालांकि ऐसा होता नहीं है, लेकिन केशव लाल ने महज 26 साल की नौकरी में ही 100 करोड़ की बेहिसाब दौलत कमा ली। यानी हर साल करीब चार करोड़ रुपये कमाए। यह सब वेतन से तो संभव नहीं है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सपा कार्यकाल में ही केशव लाल ने 30 से 40 करोड़ रुपये कमाए। केशव लाल का रिटायरमेंट वर्ष 2022 में है। 
 
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डेमो पिक
ऐसे समझें 
एक लाख 41 हजार रुपये प्रति माह वेतन 
16 लाख 92 हजार रुपये सालाना वेतन
एक करोड़ 70 लाख रुपये 10 साल में 
17 करोड़ रुपये 100 साल में 
102 करोड़ रुपये 600 साल में 
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