डकैत बबुली द्वारा मारे गए किसान का शव सील करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
पाठा के जंगलों में रहने वाला इनामी डकैत बबुली अपने लेटर पैड से वसूली करता है। बबुली के गैंग के डकैत बुदंलेखंड के गांव-गांव जाकर बबुली का लेटर पैड व्यापारियों, उद्योगपतियों और ज्वेलरी का काम करने वाले लोगों को बाटते हैं। इसके बाद रंगदारी वसूली जाती है। चित्रकूट पुलिस को पिछले दिनों छापेमारी के दौरान पाठा के जंगलों में छापामारी के दौरान दस्यु सरगना बबुली कोल का लेटर पैड भी मिला था। इसका इस्तेमाल दस्यु सरगना रंगदारी वसूली के लिए करता है। दबाव पड़ने पर दस्यु गिरोह पत्थर की दीवार की आड़ लेकर भाग निकला। पुलिस ने घेराबंदी की लेकिन बबुली हाथ नहीं लगा।
प्रेमिका की वजह से छोड़ा गैंग और खाई गोली
डकैत बबुली
मारकुंडी थानाक्षेत्र के डोडामाफी निवासी रामचरन का बेटा बबली कोल चित्रकूट के बड़े डकैतों ठोकिया और बलखड़िया के गिरोह से जुड़ा था। वह डकैत गिरोह का सक्रिय सदस्य था। डोडामाफी में हुए नरसंहार और जवानों के साथ मुठभेड़ के दौरान भी बबुली मौजूद था। दो साल पहले बबुली ने अचानक गैंग छोड़ दिया और अपनी प्रेमिका के साथ जाकर रहने लगा। इस वजह से उसका गैंग के अन्य डकैतों से विवाद हो गया लेकिन बबुली ने अपनी सूझबूझ से सबको फिर मना लिया। प्रेमिका के चक्कर में उसकी अपने ही गांव के कुछ लोगों से दुष्मनी हो गई। जिसमें हुई गोलीबारी में एक गोली बबुली को भी लगी थी।
बलखड़िया के मरने के बाद बबुली बना सरदार
बलखड़िया के शव और अपने साथियों के साथ बबुली कोल (फाइल फोटो)।
बुंदेलखण्ड की जमीं पर डकैतों का राज कई दशकों से रहा है। एक डकैत मरता है तो दूसरा पैदा हो जाता है। पांच लाख के इनामी डकैत बलखड़िया के मरने के बाद गिरोह के दूसरे सबसे बड़े 2 लाख के इनामी बबली कोल को गैंग ने अपना सरदार बना दिया।
ददुआ का चेला हुआ करता था बबुली
ददुअा की मूर्ति
डकैते बबुली कभी डकैत ददुआ का चेला हुआ करता था। ददुआ के साथ रहकर के ही बबुली ने सत्ता पक्ष के लोगों के साथ अपनी जान पहचान बढ़ाई थी।