कानपुर में 1000 अाैर 500 रुपये के बैन नाेटाें का जखीरा मिलने से हड़कम्प मच गया है। क्राइम ब्रांच अाैर एनअाईए की संयुक्त टीमाें ने छापमारी के बाद 96 कराेड़ 62 लाख रुपये की पुरानी करेंसी जप्त की है। देश के कई नामी बिल्डराें अाैर नामचीन कंपनियाें के नाम इस मामले से जुड़ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल है अाखिर 14 महीनाें बाद जब सरकार ने पुराने नाेटाें काे पूरी तरीके से बैन कर दिया है ताे कैसे ये नाेट बदले जाने वाले थे।
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कैसे बदले जाने थे नाेट अभी तक नहीं लग सका पता
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1000 अाैर 500 के बैन नाेट पकड़े गए
कानपुर के कपड़ा काराेबारी अानंद खत्री के बिल्डराें से कनेक्शन देखकर एनअाईए अाैर क्राइम ब्रांच की टीम भी हैरान है। कैसे एक कपड़ा काराेबारी नाेट बदलवाने वाला दलाल बन गया। जप्त की गई रकम किसी एक अादमी की नहीं है। इसमें कई लाेगाें का पैसा है।
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कानपुर काे ही क्याें चुना गया नाेट बदलने के लिए
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कालेधन का जखीरा
जांच अधिकारी पूछतांछ करने में लगे हैं कि इतनी बड़ी रकम काे बदलने के लिए अाखिर कानपुर काे ही क्याें चुना गया। रकम जहां से बरामद हुई है वाे मकान अानंद खत्री का ही है। एेसे में यह सवाल भी खड़ा हाे गया है कि क्या पुराने नाेटाें काे डंप करने के लिए ही एक मकान काे खरीदा गया था।
नाेट डंप करने के लिए खरीदा गया था मकान
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जांच करते हुए अधिकारी
मकान के दाे कमराें में नाेट बरामद हुए हैं। नाेटाें काे जमीन पर बैड बनाकर रखा गया था। नाेटाें काे पैक करने के लिए विशेष गत्ते तैयार किए गए थे। एक गत्ते में 1000 के नाेट वाली गड्डी की कुल रकम एक कराेड़ हाेती है।
बिल्डराें, मंत्रियाें अाैर कई शहराें से जुड़े हैं गैंग के तार
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पुलिस के साथ अाराेपी
सूत्राें की माने ताे अांनद खत्री बड़े काराेबारियाें अाैर मंत्रियाें से पुराने नाेट नए करेंसी में बदलवाने का ठेका लिया करता था। इस नाेट बदलवाने वाले गैंग के तार हैदराबाद, बनारस जैसे कई शहराें से जुड़़े हुये हैं। पकड़े गए नाेटाें काे गिनने में 18 घंटे से भी अधिक का समय लगा था। नाेटाें काे पहले बाेरियाें में भरा गया फिर बक्साें में भर कर ले जाया गया।