रेस्टोरेंट को न तो हुक्का पिलाने का लाइसेंस मिलता है और न ही वे हुक्का पिला सकते हैं। छापे के दौरान यदि कोई रेस्टोरेंट संचालक हर्बल हुक्के का दावा करे, तब भी फूड इंस्पेक्टर उसे सीज कर लैब में जांच कराना चाहिए। यह जानकारी कोटपा पर बुधवार को आयोजित कार्यशाला में दिल्ली से आए टुबैको कंट्रोल प्रोग्राम के कम्युनिकेशन मैनेजर विनॉय मैथ्यू ने दी।
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विनाॅय मैथ्यू
होटल रॉयल क्लिफ में हुई कार्यशाला में विनॉय मैथ्यू ने बताया कि तमाम रेस्टोरेंट एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) से रेस्टोरेंट का लाइसेंस लेकर हुक्का पिलाने लगते हैं, यह अवैध है। कोई भी रेस्टोरेंट हुक्का नहीं पिला सकता। कोटपा में हुक्का पिलाने पर दो साल की कैद एवं जुर्माना तक का प्रावधान है। हुक्का का कोटपा के तहत चालान किया जा सकता है।
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पुलिस ने मारे छापे
कार्यशाला में वॉलेंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वीएचआई) के सलाहकार जेपी शर्मा ने बताया कि तंबाकू उत्पादों से सरकार को जितना राजस्व मिलता है, उससे ज्यादा धनराशि इनसे होने वाली बीमारियों के इलाज पर खर्च होता है, फिर भी देश में रोज लगभग ढाई हजार लोगों की मौत इन्हीं वजहों से होती है। वीएचआई कानपुर, आगरा और गौतमबुद्ध नगर में तंबाकू के प्रति जागरूकता के लिए विशेष अभियान चला रही है।
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डेमो पिक
कोटपा को पुलिस ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम में भी शामिल कर लिया गया है। एसपी (क्राइम) ने सभी थानेदारों को चालान करने के आदेश दिए थे, पर पिछले महीने की रिपोर्ट में प्रगति शून्य रही। इसपर एडीजी ने थानेदारों को रिमाइंडर भी भेजा। डिस्ट्रिक लेवल कोऑर्डिनेशन कमेटी इस संबंध में महापौर, नगर आयुक्त से भी मिली है। जल्द ही पार्षदों के माध्यम से लोगों को प्रेरित करेगी।
कोटपा के नियमों को सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी पुलिस सहित 21 विभागों की है। डिस्ट्रिक कंसलटेंट निधि वाजपेयी ने बताया कि कानपुर में 2017 में खुली सिगरेट बेचने वाले 450 दुकानदारों के चालान कर 4.50 लाख वसूले गए। इसी तरह सार्वजनिक स्थान पर घूम्रपान करने के मामले में चालानों के माध्यम से डेढ़ लाख की वसूली हुुई। कार्यशाला में डिस्ट्रिक प्रोग्राम कोआर्डिनेटर डॉ. एसके निगम, नीरज आदि शामिल रहे।