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सिस्टम का झूठ: घाटों पर आईं लाशों ने खोली स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की पोल, हैरान कर देगी ये रिपोर्ट

Tue, 08 Jun 2021 09:13 AM IST
शिखा पांडेय मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
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घाटों के मंजर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
श्मशान में आपको अक्सर लिखा मिलता है मृत्यु ही अंतिम सत्य है। स्वास्थ्य विभाग ने ‘मृत्यु’ को ही आंकड़ेबाजी में फंसा दिया। कोरोना से हुई मौतों की संख्या छिपाने के लिए ‘झूठ’ का जाल बुना गया। अब नगर निगम की रिपोर्ट ने इस ‘झूठ’ की पोल खोलकर रख दी है। कोरोना की दूसरी लहर के पीक से अब तक जितनी मौतें स्वास्थ्य विभाग दर्शा रहा है, उसके दोगुने से ज्यादा संक्रमित शवों का संस्कार घाटों पर किया गया।

ये लाशें कोविड अस्पतालों से प्रोटोकॉल के साथ आईं थीं। कोरोना की दूसरी लहर मार्च से शुरू हुई थी। अप्रैल और मई में इसने खूब तबाही मचाई। अस्पतालों में मरीजों को जगह नहीं मिली। लोगों ने सड़कों पर ही दम तोड़ दिया। घाटों पर शव जलाने के लिए 24 घंटे से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। 70 हजार से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में थे।

तब भी स्वास्थ्य विभाग इस तबाही को अपने आंकड़ों में झुठला रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक अप्रैल 2021 से पांच जून तक कानपुर में कोरोना से 888 मौतें हुईं। जबकि इसी अवधि में कोविड अस्पतालों से शहर के दो विद्युत शव दाह गृहों में 2397 कोरोना संक्रमित शव भेजे गए।
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घाटों के मंजर की फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
इनका अंतिम संस्कार प्रोटोकॉल के तहत किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने 1509 मौतों को आंकड़ों से गायब ही कर दिया। डीएम के निर्देश पर नगर निगम ने कोरोना से मरने वालों की रिपोर्ट तैयार की है। यह स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से मेल नहीं खाती। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने दोनों विद्युत शव दाह गृहों में आए शवों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है।
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घाटों के मंजर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उनके पास इन सभी शवों का रिकॉर्ड है। दरअसल, कोरोना संक्रमितों का अंतिम संस्कार नगर निगम की ओर से संचालित दोनों विद्युत शवदाह गृहों (भैरव घाट और भगवत दास घाट) में ही किया गया जाता है। यहां सरकारी अस्पतालों के साथ शहर में बने प्राइवेट कोविड अस्पतालों से शव लाए गए थे। 

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घाटों के मंजर की फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोरोना की पहली लहर से अब तक शहर में 1738 लोगों की संक्रमण से मौतें हुई हैं। फरवरी 2020 से मार्च 2021 तक 850 लोग मरे, जबकि दूसरी लहर का कोरोना पीक यानी अप्रैल से जून तक 888 की जानें गईं। मगर शव दाहगृहों में मार्च 2021 में 14 कोरोना संक्रमित शव जले थे। अप्रैल से जून तक कुल 2604 शवों को जलाया गया। इनमें से 2397 शव तो कोरोना संक्रमित के ही थे। जिन्हें सील पैक कर अस्पतालों ने भेजा था। 
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घाटों के मंजर की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
भैरव घाट विद्युत शवदाह गृह
माह    कोरोना संक्रमितों का शव   नॉन कोविड     कुल शव

अप्रैल    1133                      79             1212
मई       1015                      55             1070
1 जून     4                           1                 5

योग    2166                       135          2282

भगवतदास घाट विद्युत शवदाह गृह
माह    कोरोना संक्रमित     नॉन कोविड        कुल शव

अप्रैल        174                36               210
मई            57                  51             108
1 जून        0                    4                 4

योग        231                  91              322


नंबर गेम
स्वास्थ्य विभाग का आंकड़ा : 888 कोरोना संक्रमितों की मौत अप्रैल से जून तक 
नगर निगम का आंकड़ा : 2397 संक्रमितों का अंतिम संस्कार अप्रैल से जून तक विद्युत शव दाह गृहों में 
कोरोना से हुई मृत्यु के मामले में स्वास्थ्य विभाग और विद्युत शवदाह गृहों के आंकड़ों में इतना अंतर नहीं हो सकता। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से मौतों के जो आंकड़े पोर्टल पर दर्ज कराए, वे नगर के ही निवासी थे। उन सभी की आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। मगर यहां के अस्पतालों में दूसरे जिलों के भी कोरोना मरीजों की मृत्यु हुई।- डॉ. नेपाल सिंह, सीएमओ
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