इटावा लोकसभा सीट पर प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी घोषित किए जा चुके है। हाल ही में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए अशोक दोहरे के प्रत्याशी बनाए जाने पर सभी राजनीतिक दलों के समीकरणों में उथल-पुथल मच गई है। इटावा लोकसभा क्षेत्र में दलित वोट बैंक पांच लाख से अधिक है।
विज्ञापन
2 of 5
ज्योतिरादित्या-राहुल गांधी के साथ अशोक दोहरे
2014 में हुए लोकसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी से अशोक दोहरे ने सीट छीनकर भाजपा के पाले में डाली थी। अशोक दोहरे, इससे पहले बसपा से विधायक रह चुके हैं और बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। उन्होंने भाजपा से टिकट लेकर चुनाव लड़ा था।
विज्ञापन
3 of 5
अशोक दोहरे- डा.रामशंकर कठेरिया (फाइल फोटो)
मोदी लहर और दलित वोट बैंक ने उन्हें ऐतिहासिक मतों से जीत दिलाई थी। इस बार दलित वोट बैंक में बिखराव साफ नजर आने लगा है। चुनाव विश्लेषकों की मानें तो दलित वोट बैंक बसपा का माना जाता है, जो अब सपा के साथ है। अशोक दोहरे के अलावा बसपा में राजनीतिक कर क्षेत्र में चार साल से जमीन मजबूत करने वाले प्रसपा प्रत्याशी शंभू दयाल दोहरे भी दलित वोट बैंक के दम पर चुनाव मैदान में हैं।
4 of 5
इटावा के सांसद अशोक दोहरे
तीन स्थानों पर बंट रहा दलित इस बार मुख्य भूमिका में नजर नहीं आने वाला दिख रहा है। इटावा में दलित वोटरों की संख्या पांच लाख 30 हजार के करीब है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अशोक दोहरे में भाजपा से चुनाव लड़ा था। चुनाव में चार लाख 39 हजार 646 मत प्राप्त कर सपा प्रत्याशी प्रेमदास कठेरिया को हराया था।
सपा प्रत्याशी को दो लाख 66 हजार 700, बसपा के अजयपाल जाटव को एक लाख 92 हजार 804, कांग्रेस की हंसमुखी कोरी को 13 हजार 397 मत मिले थे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमलेश दीक्षित ने बताया कि निश्चित ही पार्टी मजबूत होगी। कार्यकर्ता पूरी मेहनत से प्रत्याशी जिताने में मैदान में आएंगे। उम्मीद है कि इस बार सीट कांग्रेस के पाले में आएगी। बताया कि विरोध जनता में अशोक का नहीं, बल्कि भाजपा में अशोक का विरोध था।