दोस्तों हम लोगन का पुलवामा अटैक मा शहीद भये जवानन केर बलिदान का कभों नाही भुलाय का चाहि.. उनके परिवार का सम्मान करे का चाहि.. उनके परिवार के साथ खड़े रहे का चाहि.. अरे हमरा तो कलेजा फट गवा रहै जब शहीद के परिवारजन मिट्टी से लिपट लिपट के रोआवत रहें.. अउर ओसे भी जादा दु:ख उन लोगन केर है जिनका आपन सपूत से लिपट के रोवे खातिर ओकी डेड बॉडीयो तक नाय मिलि..
विज्ञापन
2 of 8
डेमो पिक
अइसेहे एक माताजी का सदमा हुई गवा रहै जब ओका लरिका ई धमाके के बाद नाही मिला.. जब सेना केर अफसर उनके घरे आय तो सबै गाँव वाले उनके घर के आगे भीड़ लगाय रहें.. सेना केर अफसर आय. तो उई अफसर से कहे लाग अरे हमरौ लरिका रमाकांत सेना मा होय.. उई नाही आवा का,..
विज्ञापन
3 of 8
डेमो पिक
सेना केर एक अधिकारी उनका बताईन कि पुलवामा मा आतंकवादी हमला भवा है अउर ओके बाद से तोहार लरिका नाही मिलि रहा.. उई अम्मा अफसर से काहे लागी अरे साहब हमार लरिका रमाकांत बचपनै से बहुत चंचल होय.. उई वही कहूँ आपन दोस्तन अउर संगी साथिन के साथ हुईहैं.. देखौ कहूँ दूसर बस मा हुईहैं.. यू अइसेहे बचपन मा भी करत रहा.. ठीक से ढूंढो वही हुईहैं..
4 of 8
डेमो पिक
ऊ जरूर कौनो दूसर बस मा होई.. अबकी आवा रहै तो हमका चिढ़ावत रहा.. कहत रहा कि अम्मा तुम्हार सब दांत गिरी गे.. जब तुम बोलति हौ तो तुम्हरे मुँहे से फुसुर फुसुर हवा निकलत है.. अबकी छुट्टी मा घरे अईबै तो मलिटरी अस्पताल मा तुमका लई जइबै अउर तुम्हरे नयी बत्तीसी लगवाय देबे.. फिर खूब गट्टा, गंडेरी, चना चबैना खायेव.. बताओ अईस मखोल करत है..
विज्ञापन
5 of 8
डेमो पिक
अबकी जब रमाकांत छुट्टी बाद वापस ड्यूटी पे जाय लाग तो ओका लरिका उमाकांत ई हमरा पोता बस अड्डा पे रोवे लाग.. ई रमाकांत से कहे लाग कि पापा हमरे स्कूल मा प्रोग्राम होत है तो सबके पापा आवत हैं.. तुम कभों नाही आत हौ.. तो रमाकांत इस से कहिन कि हम वादा करीत है कि अबकी तुम्हरे स्कूल केर प्रोग्राम मा जरूर अइबै.. रमाकांत पूछिन कि स्कूल केर प्रोग्राम मा का बनिहौ.. तो बोला सेना केर सबसे बड़ा अफसर बनब..
विज्ञापन
6 of 8
डेमो पिक
अब ई पंचे पागलपने केर बात करि रहे हैं कि हमार लरिका रमाकांत अब ना आई.. ई सब कहत है कि अब रमाकांत कभों ना आई.. अरे साहब अभीन तो बहुत काम बाकी होय.. अभीन मकान केर पलस्तर करवाय का है.. पिछली दफा आवा रहै तो आपन छोट बहिनिया केर मंगनी करि के गवा रहै..
विज्ञापन
7 of 8
डेमो पिक
अभीन तो ओकी सादीऔ करे का है.. हमार बिटवा थोडा चंचल होय.. एक जगह टिकत नाही.. आप ठीक से ढूंढो.. वहींने हुईहै.. हम आपन रमाकांत का कभों मारा नाही.. हमका याद है साहब एक बार जब ई छोट केर रहा तो खेले कूदे केर चक्कर मा पूरा दिन गायब रहा तो हम ओका का बहुत डांटा रहा.. तो रमाकांत हमसे कहे लाग कि अम्मा हमका अइसे ना डांटा करौ..
अबकी अगर डांटेव तो हम कहूँ चले जइबै.. फिर वापस कभों ना अइबै.. तो चला गवा रहै.. पर रात मा लौटि आवा रहै.. ओका पता चलि गवा रहै कि ओकी अम्मा रोआवत हैं.. अब आज आप अफसर लोगे अउर ई सबै गाँव वाले कहि रहे हैं कि हमार लरिका रमाकांत बहुत दूर चला गवा.. अब कभों वापस ना आई.. काहे ना आई वापस.. अरे अबकी तो हम ओका डांटा भी नाही.. चाहे कोऊ से पूछी लेव.. तो फिर हमार रमाकांत काहे चला गवा ?.. अउर तुम पंचे काहे रोआवत हौ .. वो आई.. अउर जरूर आई !!..