यूपी एमपी में आतंक का दूसरा नाम बन चुके कोल गैंग के डकैत बबुली और लवलेश कोल जब जिंदा थे तब भी पुलिस के लिए सिर दर्द थे अब उनके मारे जाने के बाद उनकी मौत भी पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बबुली और लवलेश के मारे जाने के बाद उनके हथियार लेकर भागने वाला डाकू सोहन कोल को पुलिस ने दबोच लिया है। सोहन ने ऐसे कई खुलासे किए हैं जिन्होंने पुलिस की रातों की नींद उड़ा दी है।
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डाकू बबुली-लवलेश की मौत
- फोटो : अमर उजाला
गैंग के बचे दो सदस्य पुलिस के लिए बने सिरदर्द
डाकू बबुली कोल के बचे दो सदस्य संजय व छोटे अभी भी पुलिस के लिए सिर दर्द बनने हुए है। यह दोनो गैंग के हार्डकोड सदस्य है जो कई साल से चलकर वारदात में शामिल रहते हैं। डाकू बबुली कोल गैंग के समाप्त होने की बात भले ही पुलिस अधिकारी कर रहे हो पर अभी भी गैंग के दो हार्डकोड सदस्य पुलिस के हाथ नहीं आए।
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डाकू सोहन कोल
- फोटो : अमर उजाला
जिसमेें संजय कोल पुत्र रज्जू कोल, निवासी टिकरा थाना मारकुंडी व छोटे उर्फ छोटा भइया पुत्र निरहुआ निवासी टिकरिया थाना मारकु ंडी है। जो अभी पुलिस के हाथ नहीं आए। बताया जाता है कि यह दोनो बहुत ही शातिर है जो कभी भी गैंग बना सकते हैं। गैंग के पास कारतूस व असलहा लाने का अधिकतर कार्य यही दोनों करते रहे हैं।
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डाकू बबुली-लवलेश की मौत
- फोटो : अमर उजाला
काला धागा वाली आटो सेमी लवलेश की
आटोसेमी रायफल को लेकर पुलिस से लेकर अन्य लोगाें में भी उत्सुकता रही। दोनों आटोसेमी एक जैसी थी। एक में काला धागा बंधा रहता था जिसे लवलेश रखता था और बिना धागा वाली बबली के पास रहती थी। तीसरी रायफल में लाल धागा होता था जिसे गैंग के अन्य मजबूत सदस्य को दी जाती थी।
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डकैत बबुली कोल और लवलेश कोल
- फोटो : अमर उजाला
दरोगा अनिल साहू की भूमिका सराहनीय
इस पूरे मामले में मानिकपुर थाने के दरोगा अनिल साहू की भूमिका की सभी ने तारीफ की। उसने अपने सूत्रों से डकैतों तक पहुंचकर यह सफलता दिलाई। डीआईजी ने अनिल को दस हजार रुपये इनाम देकर कहा कि इन्हें अच्छे थाने या चौकी में नियुक्त किया जाए ।
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बबुली कोल की आखिरी तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
रिमांड पर लेकर करेंगे पूछताछ, कई सफेदपोश होगे बेनकाब
डीआईजी दीपक कुमार व एसपी मनोज झा ने बताया कि डाकू सोहन से कई जानकारी लेनी है। इसके लिए शुक्रवार को अदालत से पांच दिन का रिमांड मांगा जाएगा। डीआईजी ने बताया कि अब गैंग का खात्मा हो गया है। इस डाकू से पूछताछ में कई सफेदपोश के अलावा राजनीति से जुडे़ लोगों के बारे में भी जानकारी मिलेगी। उस आधार पर कार्रवाई होगी।
बबुली और लवलेश कोल को मारने का दावा करने वाली टीम
- फोटो : अमर उजाला
फिरौती वसूलना रहा प्रमुख धंधा
बबुली गैंग में पकडे़ जा रहे सदस्यों का अपहरण, फिरौती, लूटपाट व विकास कार्यों मेें कमीशन लेन का प्रमुख धंधा रहा है। मिलने वाले रुपये से गैंग अपना व परिवार के खर्च चलाता रहा है। गैंग के कई सदस्यों के पकडे़ जाने पर ग्रामीणों सहित ठेकेदारों ने राहत की सांस लिया है।