12 फरवरी को चित्रकूट जिले के सीमावर्ती क्षेत्र से अपहृत तेल उद्यमी के जुड़वा बेटों के शव यूपी के बांदा जिले में मिले थे। मासूम बच्चों के अपहरण के बाद हत्या की इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। बांदा की यमुना नदी से दोनों बच्चों के शव मिलने के बाद से चित्रकूट में जमकर बवाल हुआ था। लोगों की मानें तो पुलिस की कुछ गलतियों की वजह से बच्चों की जान चली गई।
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कुछ पुलिस अधिकारी व एक जानकार ने बताया कि फिरौती की रकम देने जाने पर अपहरणकर्ताओं को पकड़ने के लिए एक चिप का प्रयोग किया गया था लेकिन रकम देने के बाद वह चिप कहीं गिर गई जिससे पुलिस हाथ मलती रह गई और एक बड़ा कलंक लग गया।
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अपहृत जुड़वा बच्चों की बेरहमी से हत्या के बाद मां बबिता देवी की हालत सुन्न जैसी हो गई है। जिससे उसके परिजनों ने प्रयागराज के अस्पताल में भर्ती कराया है। डाक्टरों के अनुसार वह कोमा में है। अपहृत जुड़वा बच्चे कई दिन से भूखे थे।
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आरोपियों के अनुसार वह खाना नहीं खाते थे। दूध जूस व पानी ही पीते थे। इसके बाद उन्हें लोेहे की जंजीर अतर्रा से खरीदकर एक साथ बांधकर पत्थर बांधकर लटका दिए और नदी में डुबो दिया। यह हत्या दो दिन पहले ही कर दी गई थी।
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पूरा घटनाक्रम कुछ यूं रहा
11 फरवरी: योजना के अनुसार जुड़वा बच्चों के अपहरण का प्रयास विफल
12 फरवरी: दिनदहाडे़ सदगुरु पब्लिक स्कूल परिसर से तेल उद्यमी के पुत्रों का बाइक से अपहरण
13 व 14 फरवरी: अपहरणकर्ता दोनों को चित्रकूट के जानकीकुंड के पास ही मास्टर माइंड पदम शुक्ला के परिचित के घर रखा।
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15 फरवरी: बोलेरोे से पीलीकोठी रोड से बांदा की ओर ले गए। जहां पहले से कुछ साथियों ने अतर्रा में एक किराए का मकान लिया था। इसी दिन रास्ते में एक के फोन से परिजनों को फिरौती के लिए 2 करोड़ मांगे।
16 फरवरी: पुलिस का दावा जमीनी विवाद रिश्तेदारों पर शक, व्यापारिक मतभेद, कई को पकड़ा
17 फरवरी: पुलिस टीम का बढ़ा दबाव, यूपी-एमपी एसटीएफ पहुंची तो आरोपी फतेहपुर के रास्ते पहुंचे प्रयागराज
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18 फरवरी: वापसी पर फतेहपुर के रास्ते से परिजनों से राहगीर के फोन से बात अन्यथा बच्चों को मारने की धमकी
19 फरवरी: परिजनों के पास पहुंचे सतना व चित्रकूट के पुलिस अधिकारियों से कहा गया कि कुछ पुलिस दबाव कम करिए। पुलिस ने दी इसकी स्वीकृति। इसी रात फिरौती के लिए 20 लाख में सौदा होने पर रात को निकले परिजन।
20 फरवरी: को तड़के लगभग तीन बजे अंधेरे में बबेरू मार्ग पर एक पुलिया पर रुपया रखने को कहा फिर कहा बच्चे को भरतकूप से लेना। जिससे पुलिस व एसटीएफ बोली कि अब बच्चे उनकी निगरानी में आ गए हैं और कल होगी रिहाई। पुलिस ने कसे तार तो डरे अपहरणकर्ता और बनाई हत्या की योजना।
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21 फरवरी : तड़के अंधेरे में ही मास्टर माइंड पदम शुक्ला के साथ राजू, लकी व विक्रमजीत ने दोनों बच्चों को जंजीर से बांधकर नदी किनारे लाए और फेंक दिया। इसके बाद शाम को उन्होंने फिर अपहृतों के परिजनों से फोन पर एक करोड़ की फिरौती मांगी।
22 फरवरी: परिजन व पुलिस परेशान। कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे अपहरणकर्ता और न बताया कि कहां है बच्चे। शक होने पर रींवा सतना पुलिस ने ट्यूशन पढ़ाने वाले व उसके मामा को लेकर खोजबीन की।
23 फरवरी: दोपहर को ही पुलिस ने सभी आरोपियों को पकड़ लिया और कुछ लोगोें ने सोशल मीडिया में फैला दिया कि बच्चे मिले और अपहरणकर्ता भी मिले। कड़ाई से पूछताछ के बाद देर शाम को आरोपियों ने राज उगला तो फिर पुलिस बबेरू नदी किराने रात को पहुंची और शव बरामद हुए।
24 फरवरी: बच्चो की हत्या की जानकारी होते ही आक्रोश अघोषित कर्फ्यू लगा, मृत बच्चों का अंतिम संस्कार। प्रदर्शनकारियों ने जानकीकुंड ट्रस्ट के निदेशक समेत दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर सीबीआई जांच की मांग की।