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रावण जैसा महाज्ञानी धरती पर कभी नहीं हुआ, अमेरिकन प्रोफेसर से जानें 'दशानन की खूबियां'

Tue, 16 Jan 2018 03:52 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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अमेरिकन प्रोफेसर ने बताईं रावण की खूबियां
रावण चारों वेदों का ज्ञाता और ज्योतिष विद्या में पारंगत था उसके जैसी बुद्धि वाला आज तक धरती पर पैदा ही नहीं हुआ।  एक बार रावण ने अपनी शक्ति के मद में आकर शिवजी के कैलाश पर्वत को ही उठा लिया था। उस समय भोलेनाथ ने मात्र अपने पैर के अंगूठे से ही कैलास पर्वत का भार बढ़ा दिया और रावण उसे अधिक समय तक नहीं उठा सका। इस दौरान रावण का हाथ पर्वत के नीचे ही फंस गया। बहुत प्रयत्न करने के बावजूद रावण अपना हाथ नहीं निकाल सका लेकिन इसी दौरान उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्त्रोत रचा।

 
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अगर रामायण के मुख्य केंद्र में रावण हो

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रावण को केंद्र बिंदु में रखते हुए सुनाई रामायण की गाथा
सोचिए अगर रामायण के मुख्य केंद्र में रावण को रख दिया जाए तो कैसा नजारा होगा। सोमवार को यही हुआ। आईआईटी कानपुर में व्याख्यान का आयोजन हुआ और उसमें मुख्य वक्ता अमेरिका के ओबरलीन कॉलेज, ओहियो की प्रो. पौल रिचमैन ने रामायण की कथा में केवल रावण की गाथा सुनाई। 
 
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बुराइयों की वजह से रावण का वध

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ओबरलिन कॉलेज, यूएसए में रामायण पर रिसर्च कर रहीं हैं
प्रो. पौल ने रावण के बारे में बताया जो उसे महान बनाती हैं जबकि उन बुराइयों के बारे में भी बताया जिसके चलते उसका वध किया गया। प्रो. पौल ने बताया कि किस तरह से रावण अपने परिवार, राज्य और उसूलों के प्रति महत्वाकांक्षी था। उन्होंने इसके लिए कई उदाहरण भी दिए। पौल ने बताया कि रावण चारों वेदों का ज्ञाता और ज्योतिष विद्या में पारंगत था। उसके जैसी तीक्ष्ण बुद्घि वाला कोई भी प्राणी पृथ्वी पर नहीं हुआ। प्रो. पौल ने भगवान शंकर द्वारा रावण से पूजा पाठ कराने के किस्से को भी सुनाया। इस दौरान प्रो. मिनी चंद्रन मैडम, प्रो. चित्रा माथुर सहित तीन सौ से ज्यादा आईआईटीयंस मौजूद रहे। 
 

शिव तांडव का किस्सा सुनाया

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अमेरिकन प्रोफेसर ने बताईं रावण की खूबियां
प्रो. पौल ने बताया कि एक बार रावण ने अपनी शक्ति के मद में आकर शिवजी के कैलास पर्वत को ही उठा लिया था। उस समय भोलेनाथ ने मात्र अपने पैर के अंगूठे से ही कैलाश पर्वत का भार बढ़ा दिया और रावण उसे अधिक समय तक नहीं उठा सका। इस दौरान रावण का हाथ पर्वत के नीचे ही फंस गया। बहुत प्रयत्न करने के बावजूद रावण अपना हाथ नहीं निकाल सका लेकिन इसी दौरान उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्त्रोत रचा।
 
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जानिए कौन हैं अमेरिकन प्रोफेसर पॉल रिचमैन

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प्रो. पौल रिचमैन
प्रो. पौल रिचमैन अमेरिका के ओबरलीन कॉलेज, ओहियो में साउथ एशियन रिलिजिन की विशेषज्ञ हैं। वह रामायण पर लंबे समय से शोध कर रहीं हैं और इसके लिए कई बार भारत और श्रीलंका का दौरा भी कर चुकी हैं। प्रो. पौल संस्कृत, तमिल की भी जानकार हैं। 
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