चैत्र नवरात्र आज से प्रारम्भ हो गए हैं और 14 अप्रैल रविवार को समाप्त होंगे। आदिशक्ति को प्रसन्न करने का यही सबसे उत्तम समय माना गया है। ज्योतिषाचार्य व पंडित नरेंद्र दीक्षित के अनुसार जानें जानिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक व प्राकृतिक महत्व के बारे में...
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नवरात्र (फाइल फोटो)
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व
- इसी दिन से सूर्योदय से परमपिता ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की। सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया साथ ही इन्हीं के नाम से विक्रमी संवत का पहला दिन प्रारंभ होता है।
- भगवान विष्णु का पहला अवतार इसी दिन हुआ था। इस बार राम नवमी बहुत ही शुभ तिथि में हो रही हैं क्योंकि भगवान राम का राज्यभिषेक इसी दिन हुआ था। शक्ति और भक्ति के नौ दिन अथार्त नवरात्र देवी भगवती का दिन भी यही है।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
- युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ। सिंध प्रांत के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरुणावतर संत झूलेलाल इसी दिन प्रकट हुए। विक्रमादित्य की तरह शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने के लिए यही दिन चुना।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
- सिख परम्परा के द्वितीय गुरु श्री आनंद देव जी का जन्म भी इसी दिन हुआ। अगर और लोगों की बात की जाए तो स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के लिए चुना था।
- महर्षि गौतम का जन्म दिवस भी इसी दिन होता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार जी का जन्म दिवस आज ही के दिन होता है।
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गुप्त नवरात्र 2019
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का प्राकृतिक महत्व
- वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही शुरू होता हैं जो उल्लास, उमंग तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंध से भरी होती है।
- किसानों के बारे में बात करें तो फसल पकने का प्रारंभ यानी किसान की मेहनत का फल मिलने का यही समय होता है।
- इस समय नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं किसी भी अच्छे कार्य की शुरुआत करने के लिए शुभ मुहूर्त माना जाता है।