चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से विक्रम संवत का परिवर्तन होता है। उसी दिन से बासंतिक नवरात्र प्रारंभ होते हैं। इस बार 6 अप्रैल यानी शनिवार से चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र प्रारंभ होकर 14 अप्रैल तक चलेंगे।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
- फोटो : self
भारतीय ज्योतिष परिषद के अध्यक्ष पंडित केए दुबे पद्मेश और महोपाध्याय आदित्य पांडेय ने बताया कि इसी तिथि से पितामह ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण किया था। आकाश में रेवती नक्षत्र था। संजोग है कि इस बार भी प्रतिपदा के दिन रेवती नक्षत्र है।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
भगवती के प्रथम स्वरूप का पूजन होगा। उस दिन वैधृति योग भी है। वैधृति योग को शुभ नहीं माना जाता, इसलिए कलश स्थापना से पूर्व स्वास्तिक चिह्न वाला ध्वज घर में अवश्य लगाएं। बताया कि विक्रम संवत 2076 का राजा शनि और मंत्री सूर्य है।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
शनि के पिता सूर्य हैं। इस कारण पिता और पुत्र का वर्ष है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति होगी। मंत्री सूर्य है यानी इस वर्ष टैक्स में वृद्धि होगी। न्यायपालिका का वर्चस्व बढ़ेगा। उत्तम वर्षा होगी।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
घट स्थापना
पवित्र मिट्टी से वेदी का निर्माण करें, फिर उसमें जौ और गेहूं बोएं तथा उस पर यथाशक्ति मिट्टी, तांबे, चांदी या सोने का कलश स्थापित करें। कलश पर देवी की मूर्ति स्थापित कर उसका षोडशोपचारपूर्वक पूजन करें। श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ विधिपूर्वक करें। पाठ की पूर्णाहुति के दिन दशांश हवन या दशांश पाठ करना चाहिए। पूजा में घी का दीपक जलाकर उसकी गंध, अक्षत, पुष्प से पूजा करें।
6 अप्रैल शनिवार को प्रतिपदा
7 अप्रैल रविवार को द्वितीया
8 अप्रैल सोमवार को तृतीया
9 अप्रैल मंगलवर को चतुर्थी
10 अप्रैल बुधवार को पंचमी
11 अप्रैल गुरुवार को षष्ठी
12 अप्रैल शुक्रवार को सप्तमी
13 अप्रैल शनिवार को अष्टमी
14 अप्रैल रविवार को नवमी व दशमी