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नवरात्र: जानिए कन्या पूजन का महत्व और इससे मिलने वाले लाभ, ये उपाय सौभाग्य में करेंगे वृद्धि

Thu, 04 Apr 2019 01:28 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कन्या पूजन (फाइल फोटो)
इस बार चैत्र नवरात्र छह अप्रैल से शुरू होंगे। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। सनातन धर्म वैसे तो सभी बच्चों में ईश्वर का रूप बताता है पर नवरात्रों में खासकर छोटी कन्याओं में माता का रूप बताया जाता है।
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कन्या पूजन (फाइल फोटो)
अष्टमी और नवमी तिथि के दिन तीन से नौ वर्ष की कन्याओं के पूजन की परंपरा है। आचार्य मनोज कुमार द्विवेदी और आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री का कहना है कि कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती हैं।
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कन्या पूजन (फाइल फोटो)
छल और कपट से दूर रहती हैं। जब नवरात्र में माता पृृथ्वी लोक पर आती है तो सबसे पहले कन्याओं में विराजित होती हैं। इनका सम्मान और आदर करना ही नवरात्रि में माता की सच्ची उपासना होगी। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र में एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

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नवरात्र (फाइल फोटो)
दो की पूजा से भोग और मोक्ष, तीन कन्याओं की अर्चना से धर्म, अर्थ व काम मिलता है। चार कन्याओं की पूजा से राज्यपद, पांच कन्याओं की पूजा से विद्या, छह की पूजा से छह प्रकार की सिद्धियां, सात की पूजा से राज्य, आठ की पूजा से संपदा और नौ की पूजा से पृथ्वी के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।
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नवरात्र (फाइल फोटो)
उन्होंने बताया कि दो साल की कन्या कुमारी, तीन साल की त्रिमूर्ति, चार साल की कल्याणी, पांच साल की रोहिणी, छह साल की कालिका, सात साल की चंडिका, आठ साल की शांभवी, नौ साल की दुर्गा और दस साल की कन्या सुभद्रा मानी जाती है।
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गुप्त नवरात्र 2019
भोजन कराने के बाद कन्याओं को दक्षिणा अवश्य देनी चाहिए तभी महामाया भगवती प्रसन्न होकर मनोरथ पूर्ण करती है। यदि यह सब नहीं कर सकते हैं तो सिर्फ कन्याओं और महिलाओं का हमेशा सम्मान दें। यह भेंट सबसे बड़ी होगी।
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