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चैत्र नवरात्र-2018: बिना कलश पूजन के अधूरे होंगे व्रत-अनुष्ठान, इन बातों का रखें ध्यान

Sun, 18 Mar 2018 12:12 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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नवरात्र विशेष

चैत्र नवरात्र 18 मार्च से शुरू होने वाले हैं। अगर देवी की स्थापना कर व्रत रख रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखने की बहुत ज्यादा जरूरत है।  नवरात्र में कलश पूजन का विशेष महत्व होता है। यह भी मान्यता है कि बिना कलश पूजन के नवरात्र पूजन पूर्ण नहीं होता। ज्योतिषाचार्य व पं. नरेंद्र दीक्षित का मानना है कि घर के मंदिर के ईशानकोण में कलश स्थापित किया जाना चाहिए। इसी दिशा की ओर मुखकर किया गया पूजन विशेष फलदायी है। 

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विशेष फलदायी है कलश पूजन 

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नवरात्र विशेष
नवरात्र अवसर पर कलश पूजन से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। नवरात्रि पर कलश स्थापना मंदिर के उत्तर पूर्व दिशा की ओर ही करना चाहिए। ध्यान रखें कि कलश स्थापना इस तरह से हो कि पूजन करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए। 
 
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कलश का विशेष महत्व  

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नवरात्र विशेष
- भगवान श्रीकृष्ण ने द्रोपदी को कलश के रूप में अक्षय पात्र दिया था। 
- भगवान श्रीराम ने रामेश्वरम की स्थापना से पूर्व कलश स्थापित किया था।
- समुद्रमंथन में मां लक्ष्मी जी ने कलश में निकले अमृत को ही वितरित किया था। 
- वेदों में कलश को ही ऊर्जा का सबसे बड़ा स्त्रोत माना गया है। 
- शास्त्रों में कलश को पृथ्वी का स्वरूप माना गया है। 
- मां सीता का जन्म पृथ्वी पर गड़े कलश से ही हुआ था। 
- धनवंतर की उत्पत्ती कलश से हुई थी। 
- कलश को भगवान विष्णु का मुख माना जाता है। 
 

राशिवार करें कलश पूजन 

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नवरात्र विशेष
नवरात्रि अवसर पर कलश स्थापना पूजन राशिवार करना बेहद फलदायी है। कलश पूजन में राशिवार ही सामग्री का प्रयोग करें। इससे उन लोगों को बेहद लाभ मिलेगा जिनके काम रुके हुए हैं। 
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लक्ष्मी प्राप्ति के लिए करें ये उपाय

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डेमाे पिक
प्रथम दिन पीली त्रिकोण आकृति की पताका विष्णु मंदिर में ऊंचाई वाले स्थान पर इस प्रकार लगाएं कि वह लहराती रहे तथा लगातार वहां बनी रहे। ऐसा करने से भगवती लक्ष्मी की कृपा आप पर निरन्तर बनी रहेंगी।
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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

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डेमाे पिक
इस बार प्रतिपदा सायं 06.32 तक रहेगी। इसलिए सायं 06.32 के पहले ही कलश की स्थापना कर लें। इसके अतिरिक्त स्थापना का शुभ समय प्रातः 09.00 से 10.30 तक रहेगा।
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