सपा शासन काल में जिले की मौरंग खदान से बांदा के पूर्व विधायक का गहरा नाता रहा है। दबदबे की चलते कई मौरंग खदानों में उनकी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदारी रही है। मौरंग के इस खेल का पर्दाफाश करने के लिए सीबीआई अब तक खदान संचालक समेत कई पट्टाधारकों से पूछताछ कर चुकी है।
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नदी की बीच धारा को काट कर होता अवैध खनन
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के मुताबिक शनिवार को केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम ने जिले और बांदा की खदानों को लेकर पूर्व विधायक के बांदा स्थित आवास में छापा मारा है। दस्तावेजों को खंगालने के साथ गेट बंद कर लंबी पूछताछ की गई है। उनके एक करीबी को पकड़ा भी गया है।
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अवैध मौरंग खनन में सीबीआई की छापेमारी
- फोटो : अमर उजाला
मौरंग खदानों में 2012 से 2016 के बीच मानकविहीन पट्टों को हथियाने के बाद मौरंग खनन किया गया था। मामले की सीबीआई जांच में जुटी है। तत्कालीन डीएम अभय सिंह पर एफआईआर भी हुई। करीब हफ्तेभर पहले जांच एजेंसी ने फतेहपुर और असोथर में दो मौरंग कारोबारियों के यहां छापा मारा था। कारोबार से संबंधित दर्जनों फाइलें व अन्य दस्तावेज साथ ले गई थी।
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मौरंग खनन
- फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के मुताबिक प्रकरण में बांदा के एक पूर्व विधायक की भी बड़ी हिस्सेदारी जिले में थी। सीबीआई की जांच के दौरान पूर्व विधायक की तलबी हुई थी। उनसे लंबी पूछताछ की गई थी। पूर्व विधायक की हर मौरंग खदान में हिस्सेदारी होना माना जाता रहा है। जांच के दायरे में आना पहले से तय था। सूत्रों के मुताबिक उनके आवास में शाम करीब पांच बजे एक साथ दस से 12 लग्जरी वाहन पहुंचे हैं।
नियमाें को ताक पर रख हुआ अवैध खनन
- फोटो : अमर उजाला
वाहनों में सीबीआई की टीम पहुंचने की चर्चा है। सूचना मिलते ही मौरंग माफियाओं में हड़कंप मचा है। यहां के माफिया के पूर्व विधायक से गहरे संबंध हैं। पूर्व विधायक की सरपरस्ती में गाजीपुर थाना क्षेत्र का एक माफिया ने मौरंग से करोड़ों की संपत्ति जुटाई है। वह पूर्व विधायक का करीबी है।