हैलट अस्पताल में बच्ची लाश कंधे पर लेकर जाता पिता
आकस्मिक चिकित्साधिकारी डॉ. मयंक से शव वाहन उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, पर उन्होंने अस्पताल में शव वाहन न होने का हवाला देकर टरका दिया। ओपीडी के बाहर खड़े कर्मचारियों से भी गुहार लगाई लेकिन वाहन नहीं मिला। बता दें कि उर्सला अस्पताल में दो शव वाहन हैं लेकिन शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हैलट में एक भी शव वाहन नहीं है।
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