कानपुर की बहू कैप्टन शालिनी सिंह ने मंगलवार को दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। शालिनी कारगिल युद्ध में शहीद हुए मेजर अविनाश सिंह भदौरिया की पत्नी हैं। शालिनी की ससुराल गोविंद नगर में है। शालिनी मेजर भदौरिया के शहीद होने के बाद से दिल्ली में रह रही हैं। राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने उन्हें पार्टी की टोपी पहनाकर सदस्यता दिलाई।
कैप्टन शालिनी ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि उनके पति देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। वे खुद सेना में रहकर देश की सेवा कर चुकी हैं। राजनीति में आने का मकसद भी देश और आमजन की सेवा करना ही है।
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कैप्टन शालिनी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
चुनावी दौर है इसलिए इस वक्त शामिल होने पर चर्चाएं हो सकती हैं लेकिन हर काम की शुरुआत का एक समय आता है। मेरा राजनीति में आने का समय अब शुरू हुआ है। आम आदमी पार्टी में शामिल होने के संबंध में बताया कि वे बीते चार साल से दिल्ली में हुए अभूतपूर्व परिवर्तनों को देख रही हैं।
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कैप्टन शालिनी सिंह
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अरविंद केजरीवाल की सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई, बिजली, पानी के मामले में बहुत अच्छे काम किए हैं। अन्य सरकारें देश के किसी अन्य राज्य में ऐसा सुधार नहीं कर पाई हैं। पार्टी की इन्हीं सकारात्मक नीतियों से प्रभावित होकर मैंने सदस्यता ली है। बोलीं, ‘मैंने अपने जीवन में कदम कदम पर संघर्ष देखा है। आम आदमी पार्टी के संघर्ष को देखती हूं तो यह मुझे प्रेरित करता है।
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कैप्टन शालिनी सिंह
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सशक्तीकरण की मिसाल हैं शालिनी
कैप्टन शालिनी सिंह महिला सशक्तीकरण की मिसाल हैं। उनके पति मेजर अविनाश सिंह भदौरिया वर्ष 2001 में शहीद हुए तो वह मात्र 23 साल की थीं। उनका बेटा ध्रुव दो साल का था। पति के शहीद होने के बाद भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला लिया। पति की शहादत के सिर्फ तीन महीने के भीतर शार्ट सर्विस कमीशन के तहत उनका चयन हुआ। पति की बरसी के सिर्फ 20 दिन शेष थे जब उन्होंने सेना में कमीशन हासिल किया। इस बीच पति को कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से नवाजा गया। शालिनी ने सेना की वर्दी में ही राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से पति का सम्मान प्राप्त किया।
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सेना में रहते हुए वर्ष 2017 में कैप्टन शालिनी ने मिसेज इंडिया क्वीन का खिताब जीता। वह पहली ऐसी भारतीय महिला हैं जिन्होंने सिंगल पैरेंट कैटेगरी में सौंदर्य प्रतियोगिता ‘मिस अर्थ’ में भारत का प्रतिनिधित्व किया और जीतीं। वीर नारी सम्मान से सम्मानित शालिनी एक सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हो गईं थी।
डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि वे शायद ही वह फिर से चल पाएं, लेकिन एक साल में वे अपने पैरों पर फिर से खड़ी हुईं। आज वह कई तरह के सामाजिक क्रियाकलापों में हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने सेना के कैंपेन ‘क्या यह आप में है’के जरिये भी अपनी छाप छोड़ी।
कानपुर में तैनात थे पिता
कैप्टन शालिनी सिंह के पिता डॉ. एसपी सिंह मूलरूप से जौनपुर के रहने वाले थे। वर्ष 1999 में शालिनी की शादी के समय वे कानपुर में ही स्वास्थ्य विभाग में अपर निदेशक थे। वे कन्नौज के सीएमओ भी रहे। इसके अलावा आसपास के कई जिलों में उनकी तैनाती रही।