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यूपी: पीएफआई के सदस्यों ने किए चौंकाने वाले खुलासे, हिंसा के पीछे एसडीपीआई को बताया राजनीतिक चेहरा

Sat, 08 Feb 2020 04:19 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा सुनील कुमार मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर में पकड़े गए पांच पीएफआई के सदस्याें ने किए चौकाने वाले खुलासे - फोटो : अमर उजाला
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हिंसा भड़काने में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) राजनीतिक चेहरा बनकर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की मदद कर रही है। 31 जनवरी को बाबूपुरवा पुलिस ने पीएफआई के जिन पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया था, उनका सीधा ताल्लुक एसडीपीआई से निकला।

 
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पुलिस व खुफिया कर रही पीएफआई के सदस्यों से पूछताछ - फोटो : अमर उजाला
इंटेलीजेंस की टीम ने जेल में उनसे पूछताछ की तो पता चला कि एसडीपीआई के कई नेता अपनी छवि का फायदा उठाकर हिंसा भड़काने में पीएफआई का सहयोग कर रहे थे। इन्हीं नेताओं की मदद से सीएए के विरोध में प्रदर्शन लगातार जारी है। मुख्यमंत्री के गंगा यात्रा कार्यक्रम से एक दिन पहले बाबूपुरवा पुलिस ने रामबाग बजरिया निवासी मोहम्मद उमर, फहीमाबाद चमनगंज निवासी सैयद अब्दुल हई हाशमी, बादशाहीनाका निवासी फैजान मुमताज, कुरियाना अनवरगंज निवासी मोहम्मद वासिफ और सरवर आलम को गिरफ्तार किया था।

 
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पुलिस की गिरफ्त में पीएफआई के सदस्य - फोटो : अमर उजाला
शुरुआती पूछताछ में पांचों ने खुद को पीएफआई सदस्य बताया था। तीन जनवरी को मेरठ पुलिस ने हिंसा भड़काने के मामले में एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष नूर हसन और उसके ड्राइवर अब्दुल मुईद हाशमी को गिरफ्तार किया था। आईबी टीम ने जेल जाकर पकड़े गए पांचों पीएफआई सदस्यों और एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष से पूछताछ की। पता चला पांचों पीएफआई की राजनीतिक शाखा एसडीपीआई से जुड़े हैं। 

 

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कानपुर में पकड़े गए संदिग्ध - फोटो : अमर उजाला
सीएम के कार्यक्रम में हिंसा करवाने की थी साजिश
पीएफआई के सदस्यों से पूछताछ में जानकारी मिली थी कि ये सीएम के कार्यक्रम में दंगा करवाने की साजिश बना रहे थे। बाबूपुरवा और यतीमखाना में 20-21 दिसंबर को हुई हिंसा में इनकी संलिप्तता की जानकारी मिलने पर एटीएस, एनआईए और आईबी के अफसरों ने भी इनसे घंटों पूछताछ की थी। 

 
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कानपुर में हिंसा के पीछे था पीएफआई का हाथ - फोटो : अमर उजाला
चुनावों में भागीदारी कर चुके सदस्यों का हिंसा में हाथ
आईबी की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पीएफआई के इशारे पर एसडीपीआई के सदस्यों ने दंगे की जमीन तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसमें शहर के कई ऐसे चर्चित चेहरे शामिल थे, जो विधानसभा से लेकर नगर निकाय तक के चुनावों मे प्रत्याशी रह चुके हैं। इन्हीं नेताओं के भड़काने पर भीड़ उपद्रवी हुई थी। लेकिन मामले में एसडीपीआई का सीधा नाम सामने न आए, इसलिए ये आरोपी खुद को पीएफआई का सदस्य बता रहे थे। आईबी ने ऐसे करीब एक दर्जन एसडीपीआई नेताओं की सूची तैयार की है, जिनके मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने के साथ उनकी पल-पल की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।

 
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मुस्लिम बस्तियों में कर रहे थे संपर्क, गांव वालों ने पकड़ा - फोटो : अमर उजाला
सिमी समर्थित 14 संगठनों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर
हिंसा भड़काने में आईबी ने अब तक 14 संगठनों की संलिप्तता पाई है। ये सभी संगठन प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया से समर्थित हैं। इसमें पीएफआई और उसकी राजनीतिक शाखा एसडीपीआई सबसे प्रमुख रूप से सक्रिय है। दिल्ली में बैठे इनके प्रमुखों के इशारे पर कानपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों के नेता प्रदर्शन की रणनीति तैयार कर रहे हैं। हालांकि अपनी राजनीतिक छवि की वजह से पुलिस की नजर से बच रहे हैं। आईबी की रिपोर्ट पर दिल्ली में पार्टी के सात बड़े नेताओं की निगरानी शुरू कर दी गई है, जो संगठनों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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